पश्चिम बंगाल में कोविड-19 के मामलों के बढ़ने के कारण ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ज्यादा लोगों के बीच नहीं ली. अब उनकी नई मंत्रिपरिषद के बारे में कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष पदस्थ सूत्रों से पता चला है कि 50 से अधिक निर्वाचित विधायकों के नए होने के साथ मंत्रियों के रूप में नए चेहरों की संभावना है. पिछली बार कुल 44 मंत्री थे, जिनमें से 28 कैबिनेट मंत्री थे और 16 राज्य मंत्री थे. Also Read - WTC फाइनल: न्यूजीलैंड से हार के बाद कप्तान Virat Kohli ने कही यह बात

दिलचस्प बात यह है कि इस बार ममता बनर्जी को अपने मंत्रिमंडल के नौ मंत्रियों को छोड़कर अपनी कैबिनेट बनानी होगी, जिसमें तीन दिग्गज नेता वित्त और उद्योग मंत्री अमित मित्रा, पर्यटन मंत्री गौतम देब और तकनीकी शिक्षा मंत्री पूर्णेंदु बसु शामिल हैं. मित्रा और बसु ने चुनाव में नहीं लड़ने का फैसला किया था, लेकिन देब उत्तर बंगाल में भाजपा के सिख चटर्जी डाबग्राम-फुबरी निर्वाचन क्षेत्र से हार गए. Also Read - WTC 2021: हार पर भड़के भारतीय फैन्‍स, विराट कोहली को दे डाली चोकर्स की तमगा

इसके अलावा तृणमूल के तीन मंत्रियों ने चुनाव से पहले पार्टी छोड़ दी थी. जिसमें राज्य के परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी और वन मंत्री राजीब बनर्जी शामिल थे. खेल राज्य मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला ने भी पार्टी छोड़ दी थी. शुक्ला ने जिन तीन चुनावों में चुनाव नहीं लड़ा, उनमें से बनर्जी की हार हुई और नंदीग्राम की लड़ाई में आधिकारी मुख्यमंत्री के खिलाफ जीत गए. उत्तर बंगाल के तीन अन्य मंत्री विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष, पश्चिमी क्षेत्र विकास मंत्री शांतिराम महतो और पंचायत राज्य मंत्री श्यामल संतरा जो इस चुनाव में हार गए थे. Also Read - Gurugram News: गुरुग्राम में Covaxin, Covishield और Sputnik V टीकें कीमत तय, सबसे महंगा कोवैक्सीन का टीका

पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, बनर्जी पिछले 10 वर्षों से वित्त और उद्योग का प्रबंधन करने वाले मित्रा के प्रतिस्थापन को चुनने में सबसे कठिन चुनौती का सामना करेंगी. एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मुख्यमंत्री का अमित मित्रा पर अटूट विश्वास था और उन्होंने मित्रा को पूरी छूट दी हुई थी, जो राज्य के लिए फायदेमंद साबित हुआ. मित्रा की अनुपस्थिति के कारण उनके लिए अपने वित्त का प्रबंधन करना मुश्किल होगा. वर्तमान में सेवानिवृत्त नौकरशाह नियंत्रित किया जा रहा है लेकिन यह एक स्थाई समाधान नहीं है.

मंत्रिमंडल शामिल होने की पश्चिम मिदनापुर के अखिल गिरी और पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर की सबसे अधिक संभावना है. गिरि, शभेंदु अधिकारी और उनके परिवार के एक कट्टर विरोधी रहे हैं, पश्चिम मिदनापुर में तृणमूल कांग्रेस की खोई हुई जगह को पुर्नजीवित करने में सहायक रहे हैं, जहां पार्टी ने 16 में से 13 सीटें जीती थीं. पूर्वी मिदनापुर के रामनगर के इस विधायक को जिले में अपने प्रदर्शन के लिए इनाम मिल सकता है.

तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनके सुप्रीमो भाजपा के आरोपों का उचित जवाब देने के लिए जिले से कुछ नए चेहरों को ला सकते हैं. इस सूची में जो नाम हैं, उनमें संथाली अभिनेत्री बीरबा हांसदा हैं, जो झाड़ग्राम से जीतीं और प्रदीप मजुमदार, जिन्होंने पश्चिम बर्दवान जिले में दुगार्पुर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की. इसके अलावा, हुमायूं कबीर जिन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूर्वी मिदनापुर जिले से जीत गए, पूर्व परिवहन मंत्री मदन जो कि कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र से जीते थे, ममता बनर्जी की परिषद में बर्थ सुनिश्चित कर सकते हैं.

मानस भुनिया, पूर्वी मिदनापुर के सबंग से राज्यसभा सांसद, जो सबंग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे, उन्हें भी मुख्यमंत्री द्वारा इनाम मिल सकता है. हुगली के पंडुआ निर्वाचन क्षेत्र से आने वाले रत्ना डे नाग और शिबपुर विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाले क्रिकेटर से राजनेता बने मनोज तिवारी भी मंत्रालय संभाल सकते हैं. (IANS Hindi)