LIVE Updates: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर यहां आयोजित ‘‘पराक्रम दिवस’’ समारोह में भाग लेने के लिए शनिवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे. इससे पहले प्रधानमंत्री ने असम के शिवसागर जिले में स्थित जेरेंगा पठार के मूल निवासी और भूमिहीन परिवारों के लिए 1.6 लाख भूमि पट्टा आवंटन अभियान की शुरुआत की. प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि मोदी ‘‘पराक्रम दिवस’’ पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने कोलकाता पहुंचे. Also Read - New Education Policy: पीएम मोदी ने कहा- प्री-नर्सरी से पीएचडी तक जल्द ही लागू हों नई शिक्षा नीति के नियम

अपने आधिकारिक कार्यक्रम में आखिरी मिनट में बदलाव करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को एल्गिन रोड पर नेताजी के पैतृक घर का दौरा किया. दोपहर करीब 2.45 बजे एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पीएम मोदी एक चॉपर से रेस कॉस ग्राउंड आए. वहां से वह सीधे नेताजी भवन में उनकी 125 वीं जयंती पर उन्हे श्रद्धांजलि देने पहुंचे. एल्गिन रोड से पीएम नेशनल लाइब्रेरी और फिर विक्टोरिया मेमोरियल पहुंचे. Also Read - World Wildlife Day: PM Modi ने पर्यावरण के लिए काम करने वालों की सराहना की, कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर स्मारक डाक टिकट जारी की. इस दौरान उन्होंने कहा, “मैं आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चरणों में शीश झुकाता हूं, उन्हें नमन करता हूं और नमन करता हूं उस मां को जिन्होंने नेताजी को जन्म दिया.” Also Read - WB Assembly Elections 2021: दिलीप घोष ने किया कंफर्म, सौरव गांगुली भाजपा में नहीं हो रहे शामिल

कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए PM मोदी ने कहा, “आज कोलकाता में आना मेरे लिए बहुत भावूक करने वाला पल है। बचपन से जब भी ये नाम सुना- नेताजी सुभाष चंद्र बोस मैं किसी भी स्थिति में रहा, ये नाम कान में पड़ते ही एक नई ऊर्जा से भर गया.”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में नेताजी भवन का दौरा किया-

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क्या-क्या बोले पीएम मोदी-

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज के ही दिन माँ भारती की गोद में उस वीर सपूत ने जन्म लिया था, जिसने आज़ाद भारत के सपने को नई दिशा दी थी. आज के ही दिन ग़ुलामी के अंधेरे में वो चेतना फूटी थी, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सत्ता के सामने खड़े होकर कहा था, मैं तुमसे आज़ादी मांगूंगा नहीं, छीन लूँगा.”

उन्होंने कहा कि देश ने ये तय किया है कि अब हर साल हम नेताजी की जयंती, यानी 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया करेंगे. हमारे नेताजी भारत के पराक्रम की प्रतिमूर्ति भी हैं और प्रेरणा भी हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि 2018 में हमने अंडमान के द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखा. देश की भावना को समझते हुए, नेताजी से जुड़ी फाइलें भी हमारी ही सरकार ने सार्वजनिक कीं. ये हमारी ही सरकार का सौभाग्य रहा जो 26 जनवरी की परेड के दौरान INA Veterans परेड में शामिल हुए.”

पीएम मोदी ने कहा, “आज हर भारतीय अपने दिल पर हाथ रखे, नेताजी सुभाष को महसूस करे, तो उसे फिर ये सवाल सुनाई देगा: क्या मेरा एक काम कर सकते हो? ये काम, ये काज, ये लक्ष्य आज भारत को आत्मनिर्भर बनाने का है. देश का जन-जन, देश का हर क्षेत्र, देश का हर व्यक्ति इससे जुड़ा है.”

उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, गरीबी को, अशिक्षा को, बीमारी को, देश की सबसे बड़ी समस्याओं में गिनते थे. हमारी सबसे बड़ी समस्या गरीबी, अशिक्षा, बीमारी और वैज्ञानिक उत्पादन की कमी है. इन समस्याओं के समाधान के लिए समाज को मिलकर जुटना होगा, मिलकर प्रयास करना होगा.