West Bengal, Kolkata News Update: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 2000 से अधिक लोगों को नकली टीका (Fake Vaccine) लगाने के 48 घंटे बाद भी पुलिस (Kolkata Police) और कोलकाता नगर निगम (KMC) को अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि कोरोना वैक्सीन (COVID Vaccine) के बदले उन्हें कौन सा टीका दिया गया. केएमसी अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि नकली शीशियों में या तो सादा पानी था या कोई अन्य टीका. वायल राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली शीशियों से पूरी तरह से अलग हैं. यह बिना किसी बैच संख्या या निर्माण तिथियों के आकार में छोटा है.Also Read - Corona Vaccine: अब नाक में लीजिए कोरोना वैक्सीन, देश के पहले नेजल वैक्सीन को मिली मंजूरी, जानिए फायदे

केएमसी के एक डॉक्टर ने कहा कि कोई एक्सपायरी डेट भी नहीं है. यह संदेह है कि लेबल अलग से बनाए गए थे और शीशियों पर चिपकाए गए थे. हमने शीशियों को फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेज दिया है. जब तक रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक हमारे लिए कुछ भी कहना असंभव होगा. जिन्होंने टीका लगाए गए लोगों का परीक्षण किया है, उन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बताया, ‘एक बात अच्छी है- नकली खुराक प्राप्त करने वालों में से किसी ने भी अभी तक कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है, लेकिन हम हर किसी पर कड़ी नजर रख रहे हैं.’ Also Read - 200 Crore Covid-19 Vaccine Completed : भारत में कोविड वैक्सीन की 200 करोड़ से ज्यादा खुराक का बना रिकॉर्ड

कोलकाता पुलिस के जासूसी विभाग ने नकली टीकाकरण रैकेट चलाने वाले देबंजन देव से पूछताछ के दौरान कुछ दिलचस्प जानकारियां हासिल की हैं. शहर की पुलिस ने केएमसी के लेटरहेड, लोगो, रबर स्टैंप और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक, देव ने लोगों को भर्ती कर वेतन दिया. देव की कंपनी में काम करने वाले एक शख्स ने कहा, ‘जब मुझे यह नौकरी मिली तो मुझे 3 लाख का भुगतान करना पड़ा. मुझे केएमसी लेटरहेड पर नियुक्ति पत्र दिया गया और देव के साथ एस्प्लेनेड में केएमसी प्रधान कार्यालय सहित कई जगहों पर गया. मुझे एक जगह खड़ा किया गया और वह चला गया.’ Also Read - Free Booster Dose: आज से फ्री में लगवाएं Covid-19 वैक्सीन का बूस्टर डोज, कब-कहां- कैसे लगवाएं टीका, जानिए सबकुछ

व्यक्ति ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह किससे मिले और उनकी क्या बातचीत हुई. मैं उनके साथ टीकाकरण अभियान के लिए सिटी कॉलेज भी गया था. मुझे इस बात का कोई संकेत नहीं था कि मैं एक धोखाधड़ी संगठन के लिए काम कर रहा हूं.’ पुलिस जांच दल का मानना है कि देबंजन देव ने पूरी योजना सोच-समझकर बनाई थी. उन्हें यह भी पता चला है कि देव अपने पड़ोसियों को बताता था कि वह एक आईएएस अधिकारी है और केएमसी में संयुक्त आयुक्त के स्तर पर काम करता है.

वह नीली बत्ती और सशस्त्र सुरक्षा गार्ड के साथ एक वाहन में घूमता रहा. एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘वह जिस कार्यालय को चलाते थे, वह केएमसी कार्यालय जैसा दिखता था और यह उम्मीद की जाती है कि उसने निगम के कुछ अधिकारियों के साथ कुछ करीबी संबंध विकसित किए थे, लेकिन हमें अभी तक उसके पैसे के स्रोत और इसके पीछे के मकसद का पता नहीं चल पाया है.’

यह पूरी घटना तब सामने आई जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि बुधवार को शहर के दक्षिणी इलाके में कस्बा इलाके में एक व्यक्ति फर्जी टीकाकरण केंद्र चला रहा है. अभिनेत्री से नेता बनीं चक्रवर्ती ने शिविर को संदिग्ध पाया जब बुधवार शाम को इस शिविर से वैक्सीन लेने के बाद उन्हें कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली और फिर उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत दक्षिण कोलकाता से देव को गिरफ्तार कर लिया. (IANS Hindi)