नई दिल्ली: प्रथम विश्व युद्ध के अंत के 100 साल पूरे होने के अवसर पर रविवार को दुनिया भर के कई नेता यहां वैश्विक स्मृति समारोह में शिरकत करेंगे. दुनिया के बड़े नेताओं का यह जमावड़ा बढ़ते राष्ट्रवाद और कूटनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है.उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू इस समारोह में भारत का नेतृत्व कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन सहित दुनिया के करीब 70 नेता 1918 में हुए युद्धविराम समझौते की शताब्दी पर फ्रांस की राजधानी में एकत्र हो रहे हैं.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे और महारानी एलिजाबेथ द्वितीय लंदन में इसी संबंध में आयोजित एक अन्य समारोह में हिस्सा लेंगी. वहीं न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया अपने स्तर पर इस संबंध में आयोजन कर रहे हैं. पेरिस में यह आयोजन ‘आर्क दे ट्रायम्फ’ के नीचे बने अनाम सैनिकों के कब्रों के पास होगा. इसमें आधुनिक काल में राष्ट्रवाद के खतरों के प्रति चेतावनियों के संबंध में बात होने की संभावना है.

पूर्वी फ्रांस के जंगलों में जिस जगह युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था, वहां की यात्रा करने के बाद शनिवार को जर्मनी की चासलर एंजेला मर्केल ने कहा, ‘यह दिन सिर्फ याद करने के लिए नहीं है, इस दिन कार्रवाई की अपील की जानी चाहिए.’ मर्केल और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस पेरिस पीस फोरम सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

वहीं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के शताब्दी समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. विदेश मंत्रालय ने के अनुसार इस शताब्दी समारोह में 50 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों या उनके प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की संभावना है.रविवार को उपराष्ट्रपति आर्क डि ट्रायोम्फी में प्रथम विश्वयुद्ध समाप्ति के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेंगे. उसकी अध्यक्षमता फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों करेंगे. भारत प्रथम विश्वयुद्ध में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में एक था.

नायडू ने एक ट्वीट में कहा, ‘फ्रांस के विलर्स गुसलेन शहर में आज भारतीय सशस्त्र बलों के स्मारक का उद्घाटन कर बेहद खुश हूं. यह उन हजारों भारतीय सैनिकों को महान सम्मान हैं जिनकी बहादुरी और समर्पण ने दुनिया भर में प्रशंसा बटोरी.’ देश की स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा फ्रांस में निर्मित यह अपनी तरह का पहला स्मारक है. इस स्मारक के निर्माण की घोषणा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा जून 2018 में पेरिस के अपने पिछले दौर के दौरान की गई थी.

इसी तरह इंग्लैण्ड में वेस्ट मिडलैंड्स क्षेत्र के स्मेथविक शहर में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लड़ाई लड़ने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में पिछले रविवार को एक नई प्रतिमा का अनावरण किया गया. गुरु नानक गुरुद्वारा स्मेथविक ने ‘लायंस ऑफ द ग्रेट वार’ नामक स्मारक बनवाया है जिसमें एक पगड़धारी सिख सैनिक नजर आ रहा है. यह स्मारक ब्रिटेन के लिए विश्व युद्धों और अन्य संघर्षों में ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा रहे सभी धर्मों के लाखों दक्षिण एशियाई सैनिकों के बलिदान के सम्मान में बनाया गया है.

(इनपुट-एजेंसियां)