इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने 100.68 अरब रुपये अनुमानित लागत वाली कुल छह प्रमुख विकास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिसमें 16.5 अरब की लागत के साथ पूर्वव्यापी (एक्स पोस्ट फेक्टो क्लीयरेंस) के साथ करतारपुर कॉरिडोर की परियोजना भी शामिल है. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाओं को राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति की एक बैठक में सोमवार को मंजूरी दी गई. बैठक की अध्यक्षता वित्त और राजस्व मामलों में प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. अब्दुल हफीज शेख ने की. परियोजना में लगभग 44 अरब रुपये की विदेशी मदद भी शामिल है. Also Read - कोविड-19: पाकिस्तान व विश्व बैंक के बीच 20 करोड़ डॉलर के ऋण पर हो रही चर्चा

यह परियोजना विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित अंतर्राष्ट्रीय विकास सहायता (आईडीए) आधारित ऋण का एक हिस्सा है. बैठक में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के चरण-1 के लिए एक इंजीनियरिंग व निर्माण कार्य के लिए पूर्वव्यापी मंजूरी मिली. इस स्वीकृति के साथ ही यहां होने वाले काम की संशोधित लागत अब 16.546 अरब रुपये निर्धारित की गई है. Also Read - पाक सरकार ने जमानत अवधि का उल्लंघन करने के आरोप में नवाज शरीफ को 'भगोड़ा' घोषित किया: रिपोर्ट

पूर्व योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने औपचारिकताओं को पूरा किए बिना इतनी बड़ी परियोजना की पूर्वव्यापी स्वीकृति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “मुझे जेल में डाल दिया गया और राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने 2.9 अरब की परियोजना के लिए मामले दर्ज किए थे, जो सभी नियमों, अनुमोदन और बोली प्रक्रिया के बाद लागू की गई थी.” Also Read - भारत ने पाकिस्तानी छात्रों को वुहान से निकालने को लेकर कही ये बड़ी बात, पर पाकिस्तान...

उन्होंने कहा, “लेकिन यहां एक परियोजना को केंद्रीय विकास कार्य दल (सीडीडब्ल्यूपी) और राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के अनुमोदन के बिना और बोली प्रक्रिया के बिना लागू किया गया है और अभी तक पूर्वव्यापी मंजूरी दी जा रही है. ये दोहरे मापदंड हैं. उन्होंने पूछा कि क्या अब एनएबी योजना मंत्री या वित्त मंत्री के खिलाफ जांच शुरू करेगी?”

सिख श्रद्धालुओं के डेरा बाबा नानक तक पहुंचने के लिए करतारपुर कॉरिडोर अहम मार्ग है. यह कॉरिडोर भारत के पंजाब स्थित डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब से जोड़ता है. मान्यता है कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक सन् 1522 में पंजाब के करतारपुर आए थे और स्थायी रूप से यहीं ठहर गए. कहा जाता है कि नानक साहिब ने अपनी जिंदगी के अंतिम 18 वर्ष यहीं गुजारे थे. यही वजह है कि भारत के साथ ही विश्वभर के सिख समुदाय के लिए करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का विशेष महत्व है.