वॉशिंगटन: महात्‍मा गांधी का लिखा हुआ एक दुर्लभ पत्र नीलाम होने जा रहा है. गुरुवार से इस बिक्री के लिए रखा गया है और इसे 50 हजार डॉलर (32 लाख 61 हजार रुपए ) चुकाने वाला इसे हासिल कर सकता है. यह लेटर फैंट स्‍याही से टाइप किया गया है और इसमें गांधी के सिग्‍नेचर अंग्रेजी में है. गांधी ने 1926 में इसे एक ईसाई धर्मगुरु मिल्‍टन न्‍यूबेरी फ्रैन्‍ट्ज को यह पत्र लिखा था. इसमें गांधी ने ईसाई धर्म के केंद्रीय चरित्र जीजस क्राइस्‍ट की प्रशंसा की गई है. राब कलेक्‍शन के मुताबिक, इस ऐतिहासिक दस्‍तावेज को डीलर ने सेल लगाई है क्‍योंकि गांधीजी का ऐसा अकेला पत्र हैं, जिसमें जीजस की चर्चा की गई है. Also Read - चीन ने दूसरे दिन ताइवान के जलडमरु मध्‍य के ऊपर 19 फाइटर जेट उड़ाए, US को लेकर दी धमकी

गांधीजी ने पत्र में ये लिखा है
गांधीजी ने पत्र में लिखा है, ‘ मैं इस विश्‍वास से बाहर नहीं जा सका कि जीजस मानवता के एक महान शिक्षक थे.’ गांधी ने लिखा, क्‍या आप नहीं सोचते हैं कि धार्मिक एकता एक सामान्य पंथ के लिए एक मैकेनिकल सदस्यता द्वारा नहीं बल्कि प्रत्येक के पंथ का सम्मान करने के लिए है?’ Also Read - 5 चीनी हैकरों ने किया बड़ा साइबर अटैक, यूएस, भारत सरकार समेत 100 से ज्‍यादा कंपनियों डाटा चोरी किया

क्‍या है इस पत्र में खास
इस पत्र को क्‍या खास बनाता है, इस बारे में राब ने कहा, ‘ गांधी ने अन्‍य धर्मों के सम्‍मान की बात कही. मैं सोचता हूं कि उनका सहनशीलता का संदेश, न केवल उनकी अनुभूति का संदेश देता है, यह अब वैसे ही महत्‍वपूर्ण है, जैसा पहले.’ Also Read - चीन ने मुस्लिमों से जबरन मजदूरी कराकर तैयार किया सामान, अमेरिका ने कहा, 'हम नहीं खरीदेंगे'

(Photo courtesy- Raab Collection)

(Photo courtesy- Raab Collection)

खास स्‍याही का उपयोग करते थे गांधीजी
राब ने बताया, ‘गांधीजी एक खास स्‍याही का उपयोग करते थे.’ ये पत्र जब लिखा गया तो तब गांधीजी भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के नेता थे. उन्‍होंने छटपटाते देश को देश को ब्र‍िटिश साम्राज्‍य से मुक्‍ति के लिए आगे बढ़ाया. उनका अहिंसक आंदोलन दो दशक तक सफलता पूर्वक चला और इसके बाद ब्रिटेन ने भारत को 1947 में आजादी दे दी.

राब कलेक्‍शन ने खरीदा था ये ऐतिहासिक पत्र
यह ऐतिहासिक पत्र राब कलेक्‍शन ने अमेरिकन से खरीदा था, जिसे उसने 1960 में पाया था. राब कलेक्‍शन के प्रेसिडेंट नाथन राब ने बताया, ‘हमने इस जेम को एक कलेक्‍शन में पाया था. ये एक शक्‍तिशाली, भावुक पत्र है.’ राब कलेक्‍शन ने गांधीजी के इस पत्र को जॉर्ज वॉशिंगठन, चार्ल्‍स डॉर्विन और नेपोलियन से जुड़े दस्‍तावेजों की तरह संभालकर रखा गया है.  (इनपुट एजेंसी)