World News: क्या वास्तव में यूएफओ या उड़न तश्तरियों का कोई अस्तित्व है? क्या सच में एलियंस भी होते हैं?  इन्हें लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं और ये लोगों के लिए हमेशा से ही रहस्य का विषय बने हुए हैं. हर कोई  इसका प्रामाणिक जवाब जानना चाहता है. इसे लेकर अब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन ने यूएफओ पर गठित अपनी टास्क फोर्स की रिपोर्ट को यूएस कांग्रेस के सामने प्रस्तुत किया है. पेंटागन की यूएफओ यूनिट के बारे में पहले दावा किया जा रहा था कि उसे भंग कर दिया गया है, लेकिन यह यूएस नेवी सहयोग से खुफिया तरीके से चल रही थी.Also Read - अमेरिका में लगातार दूसरे दिन फायरिंग, 3 की मौत 7 लोग घायल | Watch Video

नेवी इंटिलिजेंस के तहत जारी इस प्रोग्राम को अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनॉमेना टास्क फोर्स का नाम दिया गया था, जिसका काम आसमान में उड़ने वाले अलग तरह के एयरक्राफ्ट्स पर नजर रखना था. इस टास्क फोर्स में शामिल एक्सपर्ट्स इन फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स पर नजर रखकर उनके मकसद, वे कहां से आए? उनके अंदर कोई जीव है कि नहीं? जैसे सवालों के जबाव ढूंढते थे. पिछले साल जून में सीनेट की बैठक के दौरान अमेरिकी खुफिया डायरेक्टर को यह निर्देश दिया गया कि वे अगले छह महीनों के भीतर यूएफओ और एलियंस के जुड़ी रिसर्च और फैक्ट्स को कमेटी के सामने पेश करें. Also Read - अमेरिका में फिर की गई अंधाधुंध फायरिंग, 10 लोगों को गोली मारी, तीन की मौत


यूएफओ पर गठित पेंटागन टास्क फोर्स ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 2004 के बाद से धरती पर दिखे 144 यूएफओ या उड़न तश्तरियों के बारे में बताया गया है. हालांकि, पूरे रिपोर्ट में इस बात का कहीं भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि इन उड़न तश्तरियों का संबंध दूसरे ग्रहों से आए एलियंस से है या नहीं. लेकिन, पेंटागन ने एलियंस की संभावना को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया है. Also Read - अमेरिका के शिकागो में स्वतंत्रता दिवस परेड के दौरान गोलीबारी करने वाले संदिग्ध को पुलिस ने लिया हिरासत में, तस्वीर जारी

अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनबीसी न्यूज को बताया कि हमारे पास कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि यूएफओ के लिए दूसरे ग्रहों से आए जीव जिम्मेदार हैं. हम इस डेटा के जरिए जिधर भी इशारा करेंगे, लोगों का शक उधर ही घूम जाएगा. हमारे पास कोई डेटा नहीं है जो इंगित करता है कि इनमें से कोई भी अज्ञात वायु घटना किसी विदेशी या दुश्मन देश की तकनीकी का प्रयोग है.