बीजिंग: चीन में बजफीड न्यूज की ब्यूरो चीफ मेघा राजगोपालन का पत्रकारिता वीजा आवेदन ख़ारिज कर उन्हें चीन सरकार ने देश छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया है. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह चीन में विदेशी और घरेलू पत्रकारों के काम पर पाबंदियों को लेकर ‘‘बहुत चिंतित’’ है.
मानवाधिकार प्रेस पुरस्कार, 2018 से हुई थीं सम्मानित
बजफीड न्यूज से जुड़ी राजगोपालन 2012 से एशिया से सम्बन्धित ख़बरें कर रही थीं और हाल में ही उईगुर मुस्लिम बहुल वाले जिंजियान इलाके की खबरों पर प्रमुखता से रिपोर्टिंग कर रहीं थीं. कम्युनिस्ट सरकार द्वारा वीजा आवेदन खारिज करना उनके लेख ‘इक्कीसवीं सदी का पुलिस राज्य कुछ ऐसा दिखता है’ जैसे संवेदनशील माने जाने वाले विषयों पर उनके काम को लेकर सजा के तौर पर देखा जा रहा है.
It is bittersweet to leave Beijing after spending six wonderful and eye-opening years as a journalist there. In May, China’s Foreign Ministry declined to issue me a new journalist visa. They say this is a process thing, we are not totally clear why.
— Megha Rajagopalan (@meghara) August 22, 2018
राजगोपालन को उनके इस लेख के लिए मानवाधिकार प्रेस पुरस्कार, 2018 से सम्मानित किया गया था. उन्होंने अपने लेख में लिखा था था कि इस बढ़ते पुलिस राज्य में आम नागरिकों की पहचान के लिए कैमरे और फिंगरप्रिंट स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.
अमेरिका ने चीनी मीडिया की आजादी छीनने के दिए संकेत
चीन ने राजगोपालन के निष्कासन के पीछे की वजह पर कोई जानकारी नहीं दी और दूतावास के बयान में उनके नाम का जिक्र भी नहीं है. दूतावास ने कहा कि चीन में बेहतर आजादी आवश्यक है क्योंकि इसका परस्पर संबंध अमेरिका में चीनी मीडिया को मिलने वाली आजादी से है.
फोरेन कोरेस्पोंडेंट क्लब ऑफ़ चाइना ने ट्वीट कर राजगोपालन का वीजा आवेदन खारिज होने की पुष्टि की. क्लब की ओर से कहा गया कि, ‘देश में रहते हुए राजगोपालन ने पत्रकारिता के सभी नियमों का पालन किया. चीनी सरकार ने बिना कारण बताए वीजा आवेदन ख़ारिज करने की कोई वजह भी नहीं बताई है, जो कि गलत है.’
The FCCC issues the following statement in response to news that @meghara is taking up a new role after being denied a new visa in China: pic.twitter.com/3ItBcxzzrA
— Foreign Correspondents’ Club of China (@fccchina) August 22, 2018
लोकतांत्रिक देशों में प्रेस पर पाबन्दी
रिपोर्टर विदआउट बॉर्डर (RSF) के डायरेक्टर सेड्रिक अल्विअनी ने बताया कि, ‘चीन के विदेश मन्त्रालय को अपना निर्णय बदलना चाहिए. विदेशी पत्रकारों को परेशान करने से चीन की छवि नहीं सुधरने वाली. वीजा आवेदन खारिज करने की धमकी के वाक्ये लगातार बढ़ रहे हैं. ये पत्रकारों को दबाने का सबसे आम तरीका है. पन्द्रह प्रतिशत संवाददाताओं ने माना कि खुद को लोकतान्त्रिक कहने वाले देशों में पिछले साल ही उन्हें साल में कम से कम तीन बार धमकाया गया.
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