क्या छिपा है अदियाला जेल की 142 साल पुरानी दीवारों में? इमरान खान की कहानी तो सिर्फ शुरुआत है... चौंका देगी असली सच्चाई

Pakistan Adiala Jail History: अदियाला जेल की 142 साल पुरानी दीवारों में क्या राज दफन हैं, इसे लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं. इमरान खान की कहानी तो बस शुरुआत मानी जा रही है, असली सच कहीं ज्यादा गहरा है.

Published date india.com Updated: November 27, 2025 8:51 PM IST
pakistan Adiala Jail mystery
प्रतीकात्मक फोटो

Pakistan Adiala Jail History: अदियाला सेंट्रल जेल को रावलपिंडी जिला जेल भी कहते हैं और ये 142 साल से भी ज्यादा पुरानी है. पिछले सवा सौ साल में इसकी जगह चार बार बदली पहले कमेटी चौक तेली मोहल्ला रोड पर थी फिर 1882 में जिन्ना पार्क और जुडिशियल कॉम्प्लेक्स के पास शिफ्ट हुई जहां 104 साल तक रही. 1988 में पुरानी जेल को पूरी तरह तुड़वा दिया गया और अब अदियाला गांव के पास 100 एकड़ में नई जेल 1986 से चल रही है. पाकिस्तान के इतिहास की हर बड़ी घटना की गवाही इन दीवारों ने दी है.

दीवारों में दफन 142 साल के राज

अदियाला जेल सिर्फ कैदखाना नहीं बल्कि पाकिस्तान के इतिहास का खूनी और राजनीतिक आईना है. स्वतंत्रता सेनानी भुट्टो की फांसी आतंकी बड़े-बड़े नेता सबकी कहानियां इन ऊंची दीवारों में कैद हैं. 142 साल में जो सत्ता के सिंहासन पर थे वही सलाखों के पीछे पहुंचे यही इस जेल का सबसे गहरा राज है.

क्रिकेटर से प्रधानमंत्री बने इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव से हटा दिया गया और अगस्त 2023 से वो अदियाला जेल में बंद हैं. तोशाखाना केस में गिरफ्तारी हुई फिर कई मामले दर्ज हो गए. समर्थक इसे सेना का तख्तापलट बता रहे हैं और 27 महीने से यही उनकी जंग चल रही है.

ब्रिटिश राज में स्वतंत्रता सेनानियों का कैदखाना

ब्रिटिश राज में रावलपिंडी जेल को आजादी के मतवालों को कैद रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. दिल्ली हैदराबाद ढाका तक से सैनानियों को लाकर यहीं बंद किया जाता था. अल्लामा मशरिकी यानी इनायतुल्ला खान को भी इसी जेल में रखा गया था. जेल के पास एक कब्रिस्तान है जहां कई स्वतंत्रता सेनानी दफन हैं जिनकी कहानियां आज भी जिंदा हैं.

भुट्टो की फांसी और जिया का हथौड़ा

1979 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को इसी पुरानी अदियाला जेल में फांसी दी गई थी. जनरल जिया-उल-हक को डर था कि ये जगह भुट्टो की याद बन जाएगी इसलिए 1988 में पूरी जेल तुड़वा दी. उसकी जगह अब पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज जुडिशियल कॉम्प्लेक्स हाउसिंग सोसाइटी और जिन्ना पार्क बन चुके हैं. भुट्टो की फांसी के बाद जेल का नाम ही बदल गया.

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1986 में अदियाला गांव के पास 100 एकड़ में नई जेल बनी जो रावलपिंडी कोर्ट से 13 किलोमीटर दूर है. पहले 1927 कैदियों की क्षमता थी फिर बढ़ाकर 2700 और अब 3500 की गई लेकिन फिर भी कैदी कई गुना ज्यादा रहते हैं. जेल में दुर्व्यवहार की खबरें आम हैं एक बार तो 148 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे. पाकिस्तान की सबसे संवेदनशील और खतरनाक जेल मानी जाती है.

बड़े-बड़े नेताओं आतंकियों और अपराधियों का ठिकाना

इमरान खान से पहले नवाज शरीफ यूसुफ रजा गिलानी शाहिद खाकान अब्बासी आसिफ अली जरदारी शहबाज शरीफ और मरियम नवाज तक को इसी जेल में कैद रखा जा चुका है. जो कभी सत्ता के शिखर पर थे वही समय का पहिया घूमा तो सलाखों के पीछे पहुंच गए. पाकिस्तान के हर बड़े राजनीतिक ड्रामे का गवाह ये कैदखाना रहा है.

मुंबई 26/11 हमलों का मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी और उसके 8 साथी यहीं कैद रहे. पंजाब गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी को भी यहीं फांसी दी गई थी. अमेरिकी विमान अपहरण करने वालों को भी यहीं रखा गया था और फांसी की सजा पाए कैदियों का आखिरी ठिकाना भी यही है.

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