नहीं सुधरा तालिबान! बुर्के के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने चलाई गोलियां, 2 की मौत
Taliban News: अफगानिस्तान के हेरात में बुर्का नियमों के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन हिंसक हो गया. पुलिस कार्रवाई में 2 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए.
Taliban News (Image AI)
Taliban News: फगानिस्तान में महिलाओं के कपड़ों को लेकर तालिबान के सख्त नियमों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में पश्चिमी शहर हेरात में कई महिलाओं को कथित तौर पर बुर्का नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में हिरासत में लिया गया. इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर आईं और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. महिलाओं का कहना है कि उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी मिलनी चाहिए और इस तरह की कार्रवाई उनके अधिकारों के खिलाफ है.
प्रदर्शन रोकने के लिए की गई सख्त कार्रवाई
प्रदर्शन बढ़ने के बाद तालिबान प्रशासन ने भीड़ को हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के दौरान गोलीबारी भी हुई. इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार इस कार्रवाई से डरे हुए हैं और महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर चिंता जता रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों के एक समूह ने इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. विशेषज्ञों के अनुसार कार्रवाई के दौरान कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल बताया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ड्रेस कोड के आधार पर महिलाओं को हिरासत में लेना और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना चिंताजनक है.
बुर्के को लेकर क्या हैं तालिबान के नियम?
अफगानिस्तान में महिलाओं के कपड़ों से जुड़े नियम तालिबान के सदाचार और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े विभाग द्वारा लागू किए जाते हैं. इन नियमों के तहत महिलाओं को घर से बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढकने की सलाह दी जाती है. हालांकि कई महिलाएं पारंपरिक बुर्के की जगह ढीला अबाया, सिर पर स्कार्फ और चेहरे को ढकने वाला कपड़ा पहनना पसंद करती हैं. इसी बात को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलता है.
महिलाओं के अधिकारों पर फिर उठे सवाल
हेरात की घटना के बाद एक बार फिर अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि महिलाओं को अपनी बात रखने और अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए. वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तालिबान सरकार और वैश्विक संगठनों के बीच चर्चा और बढ़ सकती है.
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