
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Afghanistan-Pakistan Tension: पड़ोसियों के साथ खराब सबंध रखने की पाकिस्तान अब बड़ी कीमत चुकाने जा रहा है. भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के बाद अब अफगानिस्तान भी वॉटर स्ट्राइक करने की तैयारी में है. अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने कुनार नदी का पानी पाकिस्तान की ओर न बहने देने का फैसला किया है. अफगानिस्तान ने कुनार नदी के पानी को देश के नंगरहार इलाके की ओर मोड़ने की परियोजना पर तेजी से काम करने का फैसला किया है.
अफगानिस्तान ने अगर पाकिस्तान का पानी रोका तो इससे खैबर पख्तूनख्वा में खेती पर बुरा असर पड़ेगा. पाकिस्तान के लिए पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है. अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से ही खराब चल रहे हैं. ऐसे में कुनार नदी के पानी को लेकर किए गए फैसले से दोनों देशों के बीच तनाव और भी बढ़ सकता है.
अफगानिस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर के कार्यालय में हुई आर्थिक आयोग की तकनीकी समिति की एक बैठक में कुनार नदी से नंगरहार में दारुंटा बांध (Darunta Dam project) तक पानी ट्रांसफर करने के प्रस्ताव को चर्चा के बाद मंज़ूरी दे दी गई. इस परियोजना को अंतिम फैसले के लिए आर्थिक आयोग को भेज दिया गया है. अफगानिस्तान का ये प्रोजेक्ट सफल रहा तो फगानिस्तान के नंगरहार में सिंचाई की समस्या का समाधान हो जाएगा. लेकिन, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी की किल्लत हो जाएगी.
लगभग 500 किमी तक बहने वाली कुनार नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में हिंदू कुश पहाड़ों से निकलती है. फिर यह दक्षिण की ओर अफगानिस्तान में बहती है और कुनार और नंगरहार प्रांतों से गुज़रती है. अंत में ये काबुल नदी में मिल जाती है. इसके बाद ये तीसरी नदी पेच से मिलकर फिर से पूर्व की ओर पाकिस्तान में मुड़ जाती है. अंत में पंजाब प्रांत में अटक शहर के पास ये तीनों नदियां सिंधु नदी में मिल जाती हैं.
कुनार पाकिस्तान में बहने वाली सबसे बड़ी नदियों में से एक है. इस नदी का पानी पाकिस्तान की सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक बिजली बनाने का प्रमुख स्त्रोत है. अगर अफगानिस्तान कुनार नदी के पाकिस्तान में घुसने से पहले उस पर बांध बना देता है तो सिंचाई, पीने के पानी की सप्लाई और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए पानी मिलने में पाकिस्तान को मुसीबत हो जाएगी. भारत ने जबसे सिंधु जल संधि स्थगित की है तबसे पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है.
सिंधु जल संधि (IWT) के उलट पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस पानी के बंटवारे को लेकर कोई संधि भी नहीं है. जिसका मतलब है कि तालिबान को रोकने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय गुहार भी नहीं लगाई जा सकती.
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