भारत के 'दोस्त' ने पाकिस्तान को दिया झटका, अहम डील कर दी कैंसिल, होगा बड़ा आर्थिक नुकसान

पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब भारत के मित्र देश ने पाकिस्तान से होने वाले दवाओं के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी है.

Published date india.com Published: February 10, 2026 11:04 AM IST
भारत के 'दोस्त' ने पाकिस्तान को दिया झटका, अहम डील कर दी कैंसिल, होगा बड़ा आर्थिक नुकसान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ

Pakistan Afghanistan News: पाकिस्तान के लिए आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एक और बुरी खबर सामने आई है. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. यह फैसला न केवल पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों को भी बदलने वाला है.

अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर पाकिस्तानी दवाओं की खरीद पर रोक लगा दी है. तालिबान सरकार ने अपने देश के व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अब दवाओं के लिए पाकिस्तान पर निर्भर न रहें और व्यापार के लिए दूसरे देशों के विकल्पों को तलाशें.

तालिबान का कड़ा फैसला

इतना ही नहीं, सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान से दवाओं की तस्करी करता हुआ पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जब्त की गई दवाओं को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा. सीमा पर तैनात अधिकारियों को भी तस्करी रोकने के लिए विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

भारत के लिए क्यों है यह बड़ा अवसर?

जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान का यह फैसला सीधे तौर पर भारत के पक्ष में जा सकता है. भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है. पाकिस्तान से नाता टूटने के बाद अफगानिस्तान भविष्य में दवाओं की आपूर्ति के लिए भारत की ओर रुख कर सकता है. इससे न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि अफगानिस्तान के साथ कूटनीतिक रिश्ते भी मजबूत होंगे.

घरेलू उत्पादन और गुणवत्ता पर जोर

अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट का मानना है कि इस प्रतिबंध के कई सकारात्मक पहलू सामने आएंगे. इससे अफगानिस्तान की अपनी दवा कंपनियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. पाकिस्तानी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. अब बाजार में नई और बेहतर मानक वाली दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी.

काबुल की एक फार्मेसी कंपनी के एमडी हिकमतुल्लाह ने बताया कि कई मामलों में अफगानिस्तान में बनी दवाएं पाकिस्तानी दवाओं से कहीं बेहतर हैं. अब जरूरत है कि जनता को जागरूक किया जाए ताकि वे विदेशी दवाओं के बजाय अपने देश में निर्मित बेहतर दवाओं पर भरोसा करें.

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पहले से चल रही थी तैयारी

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है. इसकी पटकथा पिछले साल ही लिखी जा चुकी थी. 12 नवंबर 2025 को आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने वित्त मंत्रालय को एक समय सीमा दी थी. उन्होंने निर्देश दिए थे कि तीन महीने के भीतर पाकिस्तान से आने वाली दवाओं को पूरी तरह रोक दिया जाए.

बदहाल पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका!

सरकार का लक्ष्य है कि अफगानिस्तान दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर बने और आयात के लिए पाकिस्तान जैसे अस्थिर पड़ोसी पर निर्भर न रहे. पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही बदहाली के दौर से गुजर रही है. दवाओं का बाजार छिन जाने से उसकी विदेशी मुद्रा की कमाई पर असर पड़ेगा.

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