Afghanistan Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिका ने हिम्मत नहीं हारी, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना वापस बुलाने का फैसला बिल्कुल सही था. आखिर कबतक हमारे सैनिक मरते रहेंगे. बाइडन ने कहा कि अफगान सेना व नेताओं ने बिना लड़े ही हथियार डाल दिए और राष्ट्रपति अशरफ गनी बिना लड़े ही देश छोड़कर भाग गए. उन्होंने कहा कि बेशक अफगानिस्तान के हालात विकट हैं, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अशरफ गनी हैं. वहां की बदहाली के लिए वे ही जिम्मेदार हैं और दुनिया को उनसे सवाल पूछने चाहिए.Also Read - Afghanistan: US ने काबुल में ड्रोन हमले को बताया भूल, माना 10 नागरिक मारे गए थे, IS आतंकी नहीं

अमेरिका ने बहुत त्याग किया है Also Read - चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा अफगानिस्तान, भारत पहले की तरह ही अफगानों के साथ खड़ा रहेगा: एस जयशंकर

बाइडन ने आगे कहा कि हमने अपने सैनिकों को वापस बुलाने का सही फैसला लिया है. अमेरिका ने बहुत त्याग किया है और इसकी वजह से उसके संसाधनों पर असर पड़ रहा था. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें कुछ बड़े फैसले लेने थे. वो अपने सैनिकों की जान को और खतरे में नहीं डाल सकते थे. उनका शुरू से ही मानना था कि अमेरिका का काम अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ना था, राष्ट्र निर्माण करना नहीं. Also Read - Tim Paine के बयान से खफा Asghar Afghan ने लिखा खुला पत्र, 'हम टॉप-10 देशों से कंधे से कंधा मिलाकर खेल रहे...'

अफगानिस्तान के हालात बहुत गंभीर

राष्ट्र के नाम संबोधन में बाइडन ने कहा कि हमने अफगानिस्तान में तीन लाख की फौज खड़ी की थी. हमने अरबों रुपये खर्च किए. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के वक्त अफगानिस्तान में 15 हजार से ज्यादा सैनिक थे, हमारे वक्त में मात्र दो हजार सैनिक रह गए थे. इस समय छह हजार सैनिक हैं, जो काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा कर रहे हैं. इसके बावजूद हम अफगानिस्तान को आगे बढ़ाना चाहते थे. उन्होंने माना कि हाल के दिनों में हमने कई गलतियां की. अफगानिस्तान के हालात को गंभीर बताते हुए उन्होंने दुनिया से मदद के लिए आगे आने को कहा.

हमने हिम्मत नहीं हारी है

बाइडेने ने कहा कि पिछले बीस सालों से हमारी सेना वहां लड़ रही थी. लोग कहते हैं कि हमने हिम्मत हार दी, अभियान को बीच में छोड़ दिया, लेकिन हमने सही फैसला लिया, हमने ये सोचा था कि हमें और ज्यादा लोगों को मरने नहीं देना था. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में लोकतंत्र स्थापना का हमारा सपना था. अफगानिस्तान में अचानक हालात बदले और अन्य देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है.