Afghanistan Update: US will send 3,000 troops  to evacuate embassy staff from Kabul: अफगानिस्तान में तेजी से बदल रहे हालात के मद्देनजर अमेरिका काबुल में दूतावास से कुछ और कर्मियों को वापस लाने के लिए 3000 अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी. अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के अधिकारी ने बताया कि ये सैनिक अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों की वापसी में मदद करेंगे और उन्हें विमान सुविधा और सुरक्षा मुहैया कराएंगे. वहीं, ब्रिटेन भी काबुल से अपने दूतावास से कर्मचारियों और नागरिकों को निकालने के लिए 600 सैनिक भेज रहा है. वहीं, तालिबान ने काबुल के निकट सामरिक रूप से महत्वपूर्ण एक और प्रांतीय राजधानी तथा देश के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात पर कब्जा कर लिया. तालिबान अब तक 34 प्रांतीय राजधानियों में से 11 पर कब्जा कर चुका है.Also Read - PM मोदी आज यूएस के टॉप-5 सीईओ के साथ भारत में कारोबारी अवसरों पर करेंगे चर्चा

3 इंफैन्‍ट्री बटालियन अगले 24-48 घंटों में काबुल हवाई अड्डे पहुंच जाएंगी
अमेरिकी रक्षा विभाग अफगानिस्तान में काबुल से, दूतावास के कर्मचारियों को निकालने के लिए सेना भेजेगा. यह घोषणा पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने घोषणा की है. पेंटागन के प्रेस सचिव ने एक ब्रीफिंग में कहा “3 इंफैन्‍ट्री बटालियन अगले 24-48 घंटों में काबुल हवाई अड्डे पहुंच जाएंगी. वह लगभग 3,000 सैनिक होंगे ” Also Read - PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री मोदी वॉशिंगटन पहुंचे, लोगों ने त‍िरंगा लहराते हुए क‍िया भव्‍य स्‍वागत

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3,500 से अधिक अमेरिकी सैनिक कुवैत में स्टैंडबाय पर होंगे
जॉन किर्बी की घोषणा की अफगानिस्तान में 3,000 सैनिकों के अलावा, अफगानिस्तान से सेना की वापसी के प्रभावों का प्रबंधन करने के लिए 3,500 से अधिक अमेरिकी सैनिक कुवैत में स्टैंडबाय पर होंगे. अतिरिक्‍त 1,000 सैन्य कर्मियों को जोड़ा जाएगा, जो विशेष अप्रवासी वीज़ा (एसआईवी) आवेदकों को संसाधित करने में सहायता के लिए कतर जाएंगे.

यूएस कमांडरों के पास आत्मरक्षा का अधिकार, किसी भी हमले का जोरदार जवाब दे सकते हैं
पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा, राज्य विभाग के अनुरोध पर असैन्य कर्मियों की व्यवस्थित और सुरक्षित कमी का समर्थन करने के लिए बलों को तैनात किया जा रहा है. यह संकीर्ण फोकस वाला एक अस्थायी मिशन है. हमारे कमांडरों के पास आत्मरक्षा का अंतर्निहित अधिकार है और उन पर किसी भी हमले का जोरदार जवाब दिया जा सकता है.

तालिबान ने अफगानिस्तान के तीसरे सबसे बड़े शहर पर कब्जा किया
अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो बलों की वापसी के बीच तालिबान ने बृहस्पतिवार को काबुल के निकट सामरिक रूप से महत्वपूर्ण एक और प्रांतीय राजधानी तथा देश के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात पर कब्जा कर लिया. इसे मिलाकर तालिबान अब तक 34 प्रांतीय राजधानियों में से 11 पर कब्जा कर चुका है.

गजनी पर तालिबान का कब्जा, काबुल को दक्षिणी प्रांतों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राजमार्ग कटा
हेरात पर कब्जा तालिबान के लिए अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक सरकारी इमारत से भीषण गोलीबारी की आवाजें आयी जबकि तालिबान के कब्जे में आने के बाद से शहर के बाकी हिस्से में शांति है. वहीं, गजनी पर तालिबान के कब्जे के साथ अफगानिस्तान की राजधानी को दक्षिणी प्रांतों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण राजमार्ग कट गया है.

20 साल पहले अफगानिस्तान आए थे यूएस और नाटो के सैनिक 
अमेरिका और नाटो के सैनिक करीब 20 साल पहले अफगानिस्तान आए थे और उन्होंने तालिबान सरकार को अपदस्थ किया था. अब अमेरिकी बलों की पूरी तरह वापसी से कुछ सप्ताह पहले तालिबान ने गतिविधियां बढ़ा दी हैं. फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से काबुल पर कोई खतरा नहीं है लेकिन तालिबान की देश के करीब दो तिहाई हिस्से पर पकड़ मजबूत होती दिख रही है. हजारों लोग घर छोड़कर जा चुके हैं क्योंकि उन्हें डर है कि एक बार फिर तालिबान का दमनकारी शासन आ सकता है.

30 दिन में काबुल पर कब्‍जा कर सकता है तालिबान
अमेरिकी सेना का ताजा खुफिया आकलन बताता है कि काबुल 30 दिन के अंदर चरमपंथियों के दबाव में आ सकता है और मौजूदा स्थिति बनी रही तो कुछ ही महीनों में पूरे देश पर नियंत्रण हासिल कर सकता है. संभवत: सरकार राजधानी और कुछ अन्य शहरों को बचाने के लिए अपने कदम वापस लेने पर मजबूर हो जाए क्योंकि लड़ाई के कारण विस्थापित हजारों लोग काबुल भाग आए हैं और खुले स्थानों और उद्यानों में रह रहे हैं.

लश्कर गाह में भी भीषण जंग चल रही
दक्षिणी अफगानिस्तान के लश्कर गाह में भी भीषण जंग चल रही है. अगर तालिबान का हमला जारी रहा तो अफगानिस्तान सरकार को आने वाले दिनों में राजधानी और कुछ अन्य शहरों की रक्षा के लिए पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.