लाहौर. पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत के वैश्विक स्तर पर बनाए गए चौतरफा दबाव का ही असर है, जिसके कारण पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों पर वहां की सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ रही है. एक दिन पहले पाकिस्तान द्वारा गुरुवार को 2008 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के नेतृत्व वाले जमात-उद-दावा और उसकी परमार्थ संस्था फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर गुरुवार को प्रतिबंध लगाया गया. वहीं शुक्रवार को पाकिस्तान सरकार ने अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों पर नकेल कसने के जबरदस्त अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए शुक्रवार को जैश ए मोहम्मद (जेईएम) मुख्यालयों का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. इसी आतंकी संगठन (जेईएम) ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए हैं. Also Read - पुलवामा आतंकी हमला: NIA ने 13,500 पन्नों की चार्जशीट दायर की, किए कई बड़े खुलासे

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दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक दिन पहले बयान जारी कर पुलवामा हमले को जघन्य और कायराना बताया तथा इस हमले की कड़ी निंदा की. साथ ही जोर देकर कहा कि इस तरह की हरकतों को अंजाम देने वालों और धन मुहैया करने वालों को न्याय के दायरे में लाया जाए. पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने बताया, ‘‘पंजाब सरकार ने बहावलपुर स्थित जेईएम मुख्यालयों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.’’ मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने बहावलपुर में दो परिसरों को अपने नियंत्रण में लिया है और उसके कामकाज को देखने के लिए अपना एक प्रशासक नियुक्त किया है. बहावलपुर लाहौर से 400 किमी दूर है.

पुलवामा अटैक से दबाव में पाकिस्तान, 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के जेयूडी और एफआईएफ पर लगाया बैन

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गृह मंत्रालय के एक बयान में यह कहा गया है कि जैश पर कार्रवाई बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी की बैठक में लिए गए फैसले की तर्ज पर की गई. बयान में कहा गया है कि दोनों परिसरों में फिलहाल 70 शिक्षक और 600 छात्र हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया जा रहा है कि जैश मुख्यालय को अपने नियंत्रण में लेने के पीछे पाकिस्तान सरकार की असली मंशा आतंकी मसूद अजहर को बचाने की है. पाक सरकार किसी भी तरह से मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी की लिस्ट में शामिल होने से बचाना चाहती है.

(इनपुट – एजेंसी)