नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच हुई एस-400 डील के जवाब में पाकिस्तान और चीन के बीच मिलिट्री ड्रोन के लिए सौदा होने जा रहा है. चीन पाकिस्तान को हाई क्वालिटी मिलिट्री ड्रोन बेचने जा रहा है. चीन के अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी. हालांकि सौदा कितने हजार करोड़ का है, इसका खुलासा नहीं हुआ है. ग्लोबल टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार चीन इस्लामाबाद का सबसे बड़ा सहयोगी है. जो पाकिस्तान आर्मी का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर भी है. दोनों देश मिलकर सिंगल इंजन मल्टि-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जेएफ थंडर मैन्युफैक्चर कर रहे हैं.

पाकिस्तान आर्मी लंबे समय से चीन से मिलिटरी ड्रोन खरीदना चाह रही है, लेकिन भारत और रूस के बीच हुई एस-400 डील के तुरंत बाद चीन ने पाकिस्तान को ड्रोन बेचने की सहमति दे दी है. भारत और रूस के बीच पिछले हफ्ते द्विपक्षीय वार्ता के दौरान एस-400 डील पर मुहर लगी थी.जो ड्रोन पाकिस्तान चीन से खरीद रहा है उसका नाम विंग लूंग 2 है. इसने पहली उड़ान पिछले साल फरवरी में भरी थी.
एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्‍टम) एक बार में 36 निशाने भेद सकती है और एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. भारत ने रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए इस प्रणाली की खरीद के लिए रूस के साथ सौदे पर हस्ताक्षर किए.

पांच अरब डॉलर से ज्यादा कीमत की मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति सौदे पर हस्ताक्षर करने के 24 महीने बाद शुरू हो जाएगी. मिसाइल प्रणाली हासिल करने से भारत को अपने दुश्मनों खासकर पाकिस्तान और चीन के हवाई हमलों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी. सौदे पर हस्ताक्षर करना काफी महत्व रखता है क्योंकि चीन ने भी यह मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए रूस के साथ सौदे पर हस्ताक्षर किया है.

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अगले महीने चीन के आधिकारिक दौरे पर जा सकते हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि 50 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से बनने वाला चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी शुरुआत हो गई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. चीन के साथ बातचीत की जा रही है कि जो क्षेत्र नयी सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं उन पर किस तरह ध्यान केंद्रित किया जा सकता है.