अब इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर का ऐलान, ट्रंप का दावा- ईरान को नहीं देंगे एक भी डॉलर

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 19, 2026 10:25 PM IST

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हुए इजरायली हवाई हमलों में 47 लोगों की मौत हो गई, जबकि 97 लोग घायल हुए हैं.

अमेरिका और ईरान की पीस डील के बाद आखिरकार इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर का क्रेडिट खुद को और कतर को दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर स्थानीय समयानुसार शुक्रवार (19 जून 2026) की शाम 4 बजे लागू हुआ.

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अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन (Joseph Aoun) और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के बीच बेहद सकारात्मक बातचीत हुई है. ट्रंप ने इस सीजफायर का क्रेडिट खुद को दिया है. आइए जानते हैं इजरायल और लेबनान में दुश्मनी कैसे शुरू हुई? आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा क्या किया कि 34 साल बाद 2 दुश्मन दोस्त बातचीत के लिए टेबल पर आमने-सामने बैठ गए?

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इजरायल और लेबनान में क्या है दुश्मनी?

  • असल में इजरायल की सीधी दुश्मनी लेबनान से नहीं है, बल्कि लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से है. ईरान के साथ जंग में हिजबुल्लाह इजरायल पर हमले कर रहा है.
  • इजरायल और ईरान के बीच करीब 1000 किलोमीटर की दूरी है. हिज्बुल्लाह सीधे इजरायल की उत्तरी सीमा यानी लेबनान पर मौजूद है.
  • अगर ईरान हमला करता है, तो इजरायल के पास तैयारी के लिए कुछ समय मिल सकता है, लेकिन हिज्बुल्लाह के रॉकेट या ड्रोन हमले के मामले में इजरायल को संभलने का कम वक्त मिलता है. इस वजह से इजरायल को लगता है कि उत्तरी इजरायल के शहर और बस्तियां हमेशा तत्काल खतरे में रहती हैं.
  • हिज्बुल्लाह को अक्सर ईरान की फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस माना जाता है. अगर इजरायल कभी ईरान के न्यूक्लियर वॉरहेड पर हमला करता है, तो हिज्बुल्लाह को जवाबी हमले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • एक तरह से हिज्बुल्लाह ईरान के लिए बैक अप प्लान है. इसलिए ईरान को हर वक्त दो मोर्चों (ईरान और हिजबुल्लाह) से खतरा बना रहता है.

कट्टर शिया आतंकी संगठन है हिज्बुल्लाह?

हिजबुल्लाह लेबनान का कट्टर शिया आतंकी संगठन है. 1982 में इजरायल ने जब दक्षिणी लेबनान पर हमला किया था, तब हिजबुल्लाह संगठन अस्तित्व में आया. वैसे कागजों में हिज्बुल्लाह की स्थापना 1985 में हुई थी. तब से लेकर अबतक हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजरायल पर हमले करते रहते हैं. हिज्बुल्लाह के पास एक स्पेशल यूनिट है जिसे रदवान फोर्स’ कहा जाता है. इसे खास तौर पर सीमा पार कर इजरायल के अंदर घुसपैठ करने के लिए ट्रेनिंग दी गई है. 7 अक्टूबर 2023 के फिलीस्तीनी संगठन हमास ने हिज्बुल्लाह की मदद से ही इजरायल पर रॉकेट हमले किए थे. इसके बाद इजरायल ने गाजा पट्टी पर जंग छेड़ दी थी.

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इजरायली हमलों में 47 लेबनानी की मौत

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हुए इजरायली हवाई हमलों में 47 लोगों की मौत हो गई. सबसे ज्यादा नुकसान हारूफ इलाके में हुआ. यहां 9 लोगों की जान गई और 14 लोग घायल हुए. मृतकों में 3 महिलाएं शामिल हैं. बता दें कि 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में देश में 3,980 लोगों की मौत हो चुकी है.

ट्रंप ने ईरान को हर्जाना देने से किया इनकार

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान को राहत पैकेज देने की बात से मुकर गए हैं. ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा, “हम नहीं, ईरान मजबूरी में बातचीत की टेबल पर आया है. ईरान इस जंग में खत्म हो चुका है. ईरान की सैन्य ताकत बुरी तरह कमजोर हो चुकी है. उसके पास अब एयरफोर्स, नौसेना, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार जैसी क्षमताएं लगभग नहीं बची हैं."

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "बेशक हम 60 दिन की प्रक्रिया पूरी करेंगे, लेकिन ईरान को एक डॉलर भी नहीं मिलेगा.” पीस डील को लेकर पहले ऐसी खबरें थीं कि अमेरिका ईरान को री-कंस्ट्रक्शन पैकेज के तौर पर 300 अरब डॉलर यानी करीब 28 लाख करोड़ रुपये देगा.

ट्रंप ने अब तक कौन-कौन से जंग को रुकवाने का लिया क्रेडिट?

ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम (2025), ईरान-इजरायल संघर्ष (2026), कांगो-रवांडा संघर्ष,थाईलैंड-कंबोडिया तनाव, आर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष, मिस्र-इथियोपिया संघर्ष, सर्बिया-कोसोवो तनाव और गाजा में हमास-इजरायल की जंग रुकवाने का क्रेडिट लिया है.

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