धूप से बची फसल, बिजली भी बनी और कमाई भी बढ़ी... खेती का नया मॉडल बना चर्चा का विषय
ये तरीका दरअसल एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) कहलाता है. इसमें एक ही जमीन पर खेती और सोलर बिजली दोनों का काम साथ-साथ किया जाता है. यानी किसान को खेत छोड़कर सोलर प्लांट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है. (Photo/AI)
देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु परिवर्तन की वजह से किसानों के लिए खेती करना अब आसान नहीं रहा है. कहीं तेज धूप फसलों को नुकसान पहुंचा रही है तो कहीं सूखे की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है. मगर इन सभी परेशानियों से इतर अमेरिका के एक किसान ने गजब का तरीका अपनाया है. दरअसल मैसाचुसेट्स के किसान ने तगड़ा दिमाग लगाते हुए अपने खेत के ऊपर ही 832 सोलर पैनल लगा दिए. इससे ना सिर्फ बिजली बनने लगी, बल्कि फसल भी पहले से बेहतर होने लगी और कमाई का एक नया जरिया भी मिल गया.
एग्रीवोल्टाइक्स कहलाता है ये अनोखा तरीका
ये तरीका दरअसल एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) कहलाता है. इसमें एक ही जमीन पर खेती और सोलर बिजली दोनों का काम साथ-साथ किया जाता है. यानी किसान को खेत छोड़कर सोलर प्लांट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. बताया गया कि इस प्रोजेक्ट में सोलर पैनलों को जमीन से करीब 10 फीट की ऊंचाई पर लगाया गया है. इतनी जगह छोड़ी गई है कि ट्रैक्टर और दूसरी खेती की मशीनें आसानी से नीचे से निकल सकें. खेत में पहले की तरह खेती होती रहती है और ऊपर लगे पैनल बिजली बनाते रहते हैं.
शोध से पहले क्यों डरे थे वैज्ञानिक
शुरुआत में वैज्ञानिकों को डर था कि सोलर पैनलों की छाया से फसल को कम धूप मिलेगी और उत्पादन घट जाएगा. लेकिन जब पूरे सीजन तक खेती पर नजर रखी गई तो नतीजे बिल्कुल उलट निकले. रिसर्च में पाया गया कि जिन बेरी फलों की खेती सोलर पैनलों के नीचे हुई, वे खुले मैदान में उगी फसल के मुकाबले ज्यादा बड़े, ज्यादा रसदार और ज्यादा मीठे थे. दरअसल पैनलों की वजह से दोपहर की तेज धूप सीधे पौधों पर नहीं पड़ी. इससे मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनी रही और पौधों को गर्मी का कम नुकसान हुआ.
हर तरह की फसल के सही नहीं
वैज्ञानिकों का कहना है कि सोलर पैनलों की छाया से खेत का तापमान भी थोड़ा कम रहता है. इससे पानी जल्दी नहीं सूखता और सिंचाई की जरूरत भी कम पड़ सकती है. जिन इलाकों में गर्मी और सूखे की समस्या बढ़ रही है, वहां यह तरीका किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि हर फसल के लिए यह तरीका एक जैसा काम नहीं करेगा. इसलिए अलग-अलग फसलों पर अभी और रिसर्च की जा रही है. लेकिन मैसाचुसेट्स का ये शोध यह जरूर दिखाता है कि आने वाले समय में खेती और स्वच्छ ऊर्जा साथ-साथ चल सकती हैं.
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