लंदन: ब्रिटेन की जेल में बंद दाऊद इब्राहीम का शीर्ष पाकिस्तानी सहयोगी अमेरिका के प्रत्‍यर्पण से बचने के लिए भरपूर कोशिश कर रहा है. उसको बचाने की कोशिश में पाकिस्‍तान लगा हुआ है क्‍योंकि पाक को डर है कि अगर जबीर मोतीवाला का प्रत्‍यर्पण अमेरिका को हो गया तो पाक सरकार और दाउद के रिश्‍तों की पोल खुल जाएगी. दाउद के सहयोगी मोती के वकील ने ब्रिटिश अदालत से दलील में यह कहा है कि मोती अवसाद से गुजर रहा है और उसने कम से कम तीन बार आत्महत्या की कोशिश की है, जिसकी वजह से वह प्रत्यर्पण के लिए फिट नहीं है.

दाऊद के इस सहयोगी को अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने का इंतजार किया जा रहा है. अदालत में सुनवाई के दौरान जाबिर मोतीवाला और जाबिर सिद्दीक जैसे अलग-अलग नामों से बुलाए जाने वाला मोती दाऊद की डी कंपनी के नाम पर करीब 14 लाख डॉलर के धन शोधन का आरोपी है. दाऊद 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में मुख्य आरोपी है.

स्कॉटलैंड यार्ड ने पिछले साल जाबिर मोती (51) को गिरफ्तार किया था. उसे यहां सुनवाई शुरू होने पर वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया. एफबीआई ने उसपर धन शोधन, वसूली और हेरोइन जैसी गैरकानूनी सामग्री आयात करने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए हैं. वह अमेरिका में प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है.

अमेरिकी सरकार की ओर से पेश हुए बैरिस्टर जॉन हार्डी ने कहा, ”डी कंपनी में खासा रसूख रखने वाला मोती बहुत सफर करता था और अपने आका- दाऊद इब्राहीम के लिए मुलाकातों का आयोजन करता था. दाऊद इब्राहीम भारतीय मुस्लिम है. वह और उसका भाई अनीस इब्राहीम भारत से भागे हुए अपराधी हैं.”

हार्डी ने दलीलों की शुरुआत में डी कंपनी को भारत, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से संचालित होने वाला अंतरराष्ट्रीय अपराध संगठन बताया, जो अमेरिका में मादक पदार्थ की तस्करी एवं वसूली समेत अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देता है. उन्होंने न्यायाधीश जॉन जानी को बताया कि एफबीआई की तरफ से 2009 से अब तक हुईं जांचों में कई गोपनीय सूत्रों को शामिल किया गया है, जिन्होंने मोती के साथ गुप्त बैठकें की, टेलीफोन और ई-मेल के माध्यम से बातचीत की जो उसके डी कंपनी का मुख्य धनशोधक होने की ओर इशारा करते हैं.

वहीं, मोती की कानूनी टीम ने उसके बचाव में समय बीतने का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि कथित अपराध कई साल पुराने हैं और 2014 से 2018 के बीच हुई लंबी देरी को अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट नहीं किया है. बचाव पक्ष ने मोती की मानसिक स्थिति को ही केंद्र में रखा. उनका दावा था कि न्यूयॉर्क में जेल की प्रतिकूल स्थितियों से उसकी मानसिक सेहत और बिगड़ सकती है.

मोती की कानूनी टीम के अगुवा बैरिस्टर एडवर्ड फिट्जेराल्ड ने कहा, उसकी अवसाद से पीड़ित रहने का लंबा और दस्तावेजों में दर्ज इतिहास रहा है और उसने 2008, 2011 और 2015 में कम से कम तीन बार आत्महत्या करने की कोशिशें की और 2008 से पाकिस्तान में एक मनोचिकित्सक की देखरेख में है. उन्होंने उसकी हालत की गंभीरता का हवाला देते हुए कहा कि अगर मोती को प्रत्यर्पित किया गया तो उसके आत्महत्या करने का अत्यधिक खतरा है.