वॉशिंगटन: द्विपक्षीय रिश्तों में कई महीनों के तनाव के बाद अमेरिका और चीन शुक्रवार को शीर्ष स्तरीय वार्ता बहाल कर रहे हैं. इस वार्ता में व्यापार से लेकर सैन्य मामलों से जुड़े विवाद का समाधान तलाशे जाने पर चर्चा होगी. यह वार्ता वॉशिंगटन में ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अर्जेंटीना में जी-20 शिखर वार्ता के इतर अपने चीनी समकक्ष शी चिनफिंग से मुलाकात कर सकते हैं.

दोनों पक्षों को उम्मीद है कि वार्ता से कुछ प्रगति होगी.विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जिम मैटिस शुक्रवार की सुबह चीन के दो शीर्ष अधिकारियों से बातचीत में बिताएंगे. चीन के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच मैटिस ने पिछले महीने चीन की अपनी निर्धारित यात्रा रद्द कर दी थी. लेकिन चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंघे शुक्रवार को वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं.

हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन की तरफ से चीन पर कई सख्त टिप्पणियां सुनने को मिली हैं. विशेषज्ञों ने इसे शीत युद्ध के समानांतर बताया है. पेइचिंग में अमेरिका के राजदूत टेरी ब्रैनस्टैड का कहना है कि वॉशिंगटन तनाव नहीं चाहता. उन्होंने गुरुवार को कहा, ‘हम चाहते हैं कि चीन के साथ संबंध रचनात्मक और परिणामोन्मुख हों. अमेरिका चीन को सीमित करना नहीं चाहता लेकिन हम अच्छा व्यवहार चाहते हैं. अमेरिका और चीन में व्यापार के साथ-साथ कुछ सैन्य मुद्दों पर भी गहरे मतभेद सामने आए हैं.

कुछ दिन पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ का कहना है कि चीन व्यापार और बौद्धिक संपदा अधिकार सहित सारे मोर्चों पर अमेरिका के लिए दीर्घाकालिक चुनौती पेश करता है.अमेरिकी रेडियो प्रस्तोता टोनी काट्ज के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘चीन एक दीर्घावधि चुनौती है. यह प्रत्येक मोर्चे पर है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनुचित व्यापार की चुनौती का सामना करना शुरू कर दिया है. अमेरिका चीन से समान और अनोन्य व्यापार की मांग करता है और ट्रम्प इसे प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

उन्होंने कहा कि चीन के दक्षिण चीन सागर में सतत प्रयासों सहित कई तरह की दावों की चुनौतियां अमेरिका के समझ मौजूद हैं. विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि चीनी लोगों पर बौद्धिक संपदा को चुराने का दोष है. बीते सप्ताह दस चीनी लोगों पर विमानन संबंधी बौद्धिक संपदा चुराने का दोष सिद्ध हुआ.

(इनपुट-भाषा)