वाशिंगटनः भारत और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदे को लेकर ट्रंप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन नहीं चाहता है कि वह कोई ऐसा निर्णय ले जिससे ‘उसके बड़े रक्षा सहयोगी’ भारत की रक्षा क्षमताओं में गिरावट आए. दरअसल अधिकारी ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट’ (सीएएटीएसए) का हवाला दे रहे थे जिसके तहत रूस से महत्वपूर्ण रक्षा खरीदारी प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर संबंधित देश पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं. Also Read - Tamil Nadu Elections: पीएम मोदी बोले- भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण क्षण में होने जा रहे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव

अमेरिका ने इससे पहले कहा था कि वह भारत समेत कई देशों को सीएएटीएसए के तहत संभावित प्रतिबंधात्मक गतिविधियों से बचने और उसकी पहचान करने में मदद कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कई वार्ताओं के बाद भारत और रूस ने अक्टूबर, 2018 में पांच अरब डॉलर के एस-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदे पर हस्ताक्षर किया था. Also Read - जो बाइडन ने अमेरिका में वैध आव्रजन को रोकने वाले प्रतिबंध को हटाया

एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की रूस से खरीदारी के निहितार्थ को लेकर पूछे गए सवाल पर अधिकारी ने कहा, ‘‘ मैं जानता हूं कि भारत ने वाजिब चिंताएं जाहिर की हैं… वह इसे पूरी तरह से बंद नहीं करना चाहते हैं…और वह हमारे प्रमुख साझेदार हैं और हम नहीं चाहते हैं कि उनके साथ ऐसा हो. हम उनकी रक्षा क्षमताओं को कम नहीं करना चाहते हैं.’’ Also Read - Narendra Modi Stadium: अब नरेंद्र मोदी स्टेडियम कहलाएगा मोटेरा स्टेडियम, स्पोर्ट्स एन्क्लेव का नाम सरदार पटेल के नाम पर

अमेरिका ने कहा कि इस तरह की बड़ी खरीददारी सीएएटीएसए प्रतिबंधों के दायरे में आती है और इसके तहत ही तुर्की के खिलाफ कदम उठाया गया था. एस-400 रूस की सबसे आधुनिक लंबी दूरी वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है. सबसे पहले चीन ने 2014 में इस प्रणाली की खरीददारी की थी.