इस्लामाबाद: गुरुवार को अपनी अमेरिकी यात्रा से लौटे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को सिर्फ भारत के साथ रिश्ते या अफगान मुद्दे के चश्मे से नहीं देखना चाहिए.

अफगान व भारतीय चश्मा उतारे अमेरिका: कुरैशी
अमेरिका की 10 दिवसीय यात्रा से वापस लौटने के बाद मुल्तान में उन्होंने कहा कि यह सही नहीं होगा कि हमारे संबंधों को सात दशक पीछे जाकर अफगान के परिप्रेक्ष्य में या भारतीय चश्मे से देखा जाए. विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को यह समझाने का प्रयास किया.

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पाकिस्तानी अखबार की खबर के अनुसार, उन्होंने शनिवार को कहा कि यह उम्मीद करना गलत होगा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मतभेदों को एक दिन में सुलझाया जा सकता है. कुरैशी ने कहा कि क्षेत्रीय परिस्थितियां बदलती हैं और जरूरतें भी बदलती हैं लेकिन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में पाकिस्तान के योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए.

अमेरिकी विदेश मन्त्रालय की प्रवक्ता ने माइक पोम्पिओ और कुरैशी की मुलाकात सम्बन्धी तस्वीर साझा करते हुए कहा कि मुलाकात में दोनों राजनेताओं ने साउथ एशिया में शान्ति पर बल देते हुए आपसी सहयोग की पुष्टि की.

ट्रम्प के दक्षिण एशिया नीति से पाकिस्तान बैकफुट पर
गौरतलब है ट्रम्प सरकार की नई अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति की घोषणा आने के बाद से ही पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है. नई नीति में अमेरिका ने ये माना है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देने का काम कर रहा है. ट्रम्प और विदेश मन्त्री पोम्पिओ ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी तब तक के लिए रोक दी है जब तक पाकिस्तान तालिबानी आतंकवादियों के खिलाफ कार्यवाही में अपनी प्रतिबद्धतता नहीं दिखाता.

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