'अमेरिका ईरान को नहीं देगा 300 अरब डॉलर...', डील पर ट्रंप का नया बयान, बताया-ईरान नहीं, तो फिर कौन फैला रहा 'अफवाह'
US Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने और न ही रखने पर सहमत हो गया है.
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की विपक्षी पार्टी अफवाह फैला रही है. (photo credit IANS, for representation only)
US Iran Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के शांति समझौते के बारे में कई जानकारी दी है. उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को पैसे देगा. उन्होंने इस दावे को झूठा बताया और इस खबर को फैलाने के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया.
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, ईरान कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है! साथ ही, यह खबर कि अमेरिका ईरान को 30 करोड़ डॉलर दे रहा है, फेक न्यूज है, जिसे 'डमोक्रेट्स' (Dumocrats) ने फैलाया है.
डील पर हो चुके हैं हस्ताक्षर
अमेरिका के एक सीनियर अधिकारी ने सोमवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ ने अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं.
सबसे पहले खुलेगा होर्मुज
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को बढ़ाने और दुनिया के लिए तेल के अहम रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक शुरुआती समझौता हुआ है. उम्मीद है कि इस समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर किए जाएंगे.
क्या तुरंत थमेगा ईंधन संकट?
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह समझौता आगे बढ़ता भी है, तो भी जलडमरूमध्य के बंद होने से पैदा हुई उथल-पुथल के बाद एनर्जी मार्केट को स्थिर होने में महीनों लग सकते हैं.
सबसे मुश्किल है इजरायल का मामला
इस समझौते को लागू करने में जमीनी स्तर पर अभी भी बड़ी मुश्किलें हैं. इजरायल का कहना है कि वह लेबनान में कब्जे वाले उन इलाकों से पीछे नहीं हटेगा जहां वह अभी भी हिज़्बुल्लाह से लड़ रहा है. चूंकि इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है, इसलिए मामला और उलझ सकता है. ईरान ने कहा है कि किसी भी अंतिम समझौते में लेबनान में लड़ाई का अंत शामिल होना चाहिए.
ईरान ने कहा, अविश्वास की जड़ें बहुत गहरी हैं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका-ईरान समझौते और उससे जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि 1953 के तख्तापलट से चली आ रही पुरानी शिकायतों के कारण अमेरिका के लिए ईरान का भरोसा जीतना एक "लंबा रास्ता" तय करने जैसा है. उन्होंने कहा कि अविश्वास की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे जल्दी हल नहीं किया जा सकता.
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