वाशिंगटन: भारत-पाकिस्तान के तनाव भरे हालातों के चलते पूरे विश्व की निगाहें दोनों देशों के बीच होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हुई हैं. चूंकि दोनों ही देश परमाणु शक्ति सम्पन्न हैं ऐसे में वैश्विक चिंता लाजमी है. ऐसे ,ए अमेरिका की एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करने के लिए कोई रास्ता तलाशना होगा कि पाकिस्तान और भारत के बीच कोई परमाणु टकराव नहीं हो.

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अमेरिका को हस्तक्षेप करना होगा
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे. भारत ने 26 फरवरी को बालाकोट में जैश के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर के खिलाफ हवाई कार्रवाई की. पाकिस्तान ने अगले दिन भारतीय सैन्य संस्थानों को निशाना बनाने का प्रयास किया.

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क्लिंटन प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में 1997 से 2001 तक अमेरिका की विदेश मंत्री रहीं मेडलीन अलब्राइट ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमें यह सुनिश्चित करने का रास्ता तलाशना होगा कि परमाणु टकराव नहीं हो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अमेरिका को इसमें हस्तक्षेप करना होगा और मेरा मानना है कि यह अच्छा विचार होगा. हम इस स्थिति को बेकाबू नहीं होने दे सकते. वह बुधवार को ‘ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति का आकलन’ विषय पर सुनवाई के दौरान कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन के सवाल का जवाब दे रही थीं. (इनपुट एजेंसी)

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