नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कश्मीर की मौजूदा स्थिति और घाटी में यूरोपीय संघ के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से संबंधित बातचीत होने की संभावना है. जर्मनी चाहता है कि घाटी में जल्द से जल्द प्रतिबंध हटाए जाएं.

पिछले महीने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख फेडरिका मोघेरिनी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान उन्हें कश्मीर पर अपनी आधिकारिक स्थिति से अवगत कराया था. भारत ने अपने राजनयिक स्रोतों के माध्यम से जर्मनी और यूरोपीय संघ के अन्य देशों के सामने कश्मीर में स्थिति और उसे विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने पर अपने आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है.

कश्मीर पहुंचे यूरोपीय संघ के सांसदों ने कहा : अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला

जर्मन राजनयिक सूत्रों का कहना है “मोदी और मर्केल दोनों के करीबी संबंध हैं. इसलिए कोई भी विषय आ सकता है. वह किसी भी मुद्दे पर बात कर सकते हैं.” दोनों नेताओं के बीच कश्मीर में यूरोपीय संघ के संसदीय प्रतिनिधि मंडल की यात्रा से संबंधित बातचीत हो सकती है.

आपको बता दें कि दूसरी भारतीय राजनीतिक पार्टियां यूरोपीय संघ के सांसदों के इस दौरे का कड़ा विरोध कर रही हैं और वही दूसरी तरफ सांसदों के दल ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि हमारे इस दौरे को गलत नजरिये से न देखा जाए. ईयू सांसदों ने कहा कि हमारे दौरे को गलत तरीके से प्रचारित किया गया. उन्होंने कहा कि अगर हम नाजीवादी होते तो जनता हमें नहीं चुनती. हम भारत और पाकिस्तान में बातचीत चाहते हैं. सांसदों ने कहा कि कश्मीर पर  पश्चिम मीडिया का रवैया सही नहीं है.