पहले आग के गोले में बदला 'ओरियन' फिर बीच समंदर... जानें Artemis 2 की सफल लैंडिंग का रोमांचक किस्सा

NASA के आर्टेमिस-II के क्रू सक्सेसफुली धरती पर वापस लौट आए हैं. ये क्रू ओरियन कैप्सूल में सुरक्षित बंद थे. आइये जानते हैं कि ओरियन कैप्सूल के वायुमंडल में री-एंट्री से लेकर स्प्लैशडाउन की पूरी कहानी...

Published date india.com Published: April 11, 2026 9:30 AM IST
NASA Artemis II Successful landing story
NASA की आर्टेमिस-II की सफल लैंडिंग की कहानी

NASA Artemis II landing story: क्या आपने कभी गौर किया है कि अंतरिक्ष से लौटते समय यानि री-एंट्री के वक्त ओरियन कैप्सूल आग काे गोला जैसा क्यों दिखाई पड़ता है? आर्टेमिस II मिशन के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा. ओरियन कैप्सूल ने जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, हवा के घर्षण से कैप्सूल की गर्मी  2700 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है, जिसे मात देकर ही इंसानों की आंतरिक्ष सफल होती है.

ओरियन कैप्सूल में लगी आग!

जब ओरियन कैप्सूल अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर लौटता है, तो इसकी रफ्तार तकरीबन 35,000 से 40,000 किमी/घंटा होती है. जैसे ही यह पृथ्वी के वायुमंडल में एंट्री लेता है, हवा के साथ होने वाले भीषण घर्षण (Friction) के कारण कैप्सूल के चारों ओर की हवा प्लाज्मा में बदल जाती है. यही कारण है, कि कैप्सूल बाहर से देखने पर एक खौफनाक आग के गोले जैसा नजर आता है.

बीच समंदर डूबे स्पेसट्रैवलर

इतना तो सबको पता होगा कि ये लैंडिंग जमीन के बजाय समुद्र में होती है. वहीं, ओरियन कैप्सूल को सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतारा गया, इस प्रोसेस को स्प्लैशडाउन कहते हैं. समंदर की लहरों के बीच गिरते ही यह कैप्सूल एक नाव की तरह तैरने लगता है. हालांकि, यह डूबने जैसा लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से वॉटरटाइट और स्टेबल होता है, जिससे इसके अंदर मौजूद सिस्टम और स्पेसट्रैवलर पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

2700 डिग्री सेल्सियस की गर्मी सह गया ओरियन कैप्सूल

री-एंट्री के समय टेंपरेचर, सूरज की सतह के आधे हिस्से जितना गर्म यानी लगभग 2700°C यानि 5000°F के आसपास तक होती है. ये गर्मी इतनी ज्यादा होती है कि किसी भी नॉर्मल मेटल को तुरंत पिघला सकती है. ओरियन कैप्सूल इस टेंपरेचर को आसानी से झेल सकता है लेकिन इसके बाहरी आवरण पर नजारा किसी आग के गोले जैसा होता है. बता दें कि ओरियन कैप्सूल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके बाहर भीषण आग जैसा नजारा होने के बावजूद, कैप्सूल के अंदर का तापमान नॉर्मल बना रहता है, जिससे इंसान सुरक्षित रह सकें.

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किस मेटेरियल से बना होता है ओरियन कैप्सूल?

ओरियन की सबसे बड़ी ताकत उसकी हीट शील्ड है. ओरियन कैप्सूल को विशेष एब्लेटिव मटेरियल (Avcoat) से बनाया जाता है. यह मटेरियल गर्म होने पर धीरे-धीरे जलकर खुद को खत्म करता है (Chipping away), जिससे गर्मी कैप्सूल के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती. इसके अलावा इसमें एल्युमीनियम-लिथियम अलॉय और टाइटेनियम का इस्तेमाल होता है जो इसे हल्का और मजबूत बनाता है.

री-एंट्री से रेसक्यू तक की पूरी कहानी

यह सफर तीन चरणों में पूरा होता है. सबसे पहले री-एंट्री होती है जहां प्लाज्मा ब्लैकआउट के कारण कैप्सूल के अंदर से कुछ देर संपर्क टूट जाता है. इसके बाद पैराशूट सीक्वेंस शुरू होता है, जिसमें पहले दो छोटे ड्रोग पैराशूट और फिर तीन विशाल मेन पैराशूट खुलते हैं जो गति को बहुत धीमा कर देते हैं. आखिरी चरण रेस्क्यू है, जहां इस बार यूएस नेवी के जहाज, USS John P. Murtha ने स्पेसट्रैवलर को समुद्र से सुरक्षित रेस्क्यू किया.

अपोलो-11 के बाद चांद पर भेजे गए इंसान

अपोलो मिशन के दशकों बाद, नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम (Artemis Program) इंसानों को फिर से चांद पर बसाने की तैयारी है. आर्टेमिस II एक क्रूड मिशन (Manned Mission) है जो चंद्रमा की परिक्रमा करके वापस लौटेगा. यह मिशन आर्टेमिस III के लिए नींव का पत्थर है, जिसके तहत इंसान को चंद्रमा की सतह पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है.

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