आसिम मुनीर पर भड़के पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु, 'ईरान चले जाओ' बयान से मचा बवाल, सेना पर लगे बड़े आरोप
असिम मुनीर के बयान से पाकिस्तान में बवाल मच गया. उनके गो टू ईरान वाले बयान ने शिया समुदाय में गुस्सा भर दिया, जिसे लेकर देश में खूब विवाद हुआ.
शिया नेताओं का कहना है कि उनकी भावनाओं को देशभक्ति से जोड़कर देखना गलत है. (Photo from Zee News)
पाकिस्तान चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड के मार्शल आसिम मुनीर के एक बयान ने देश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. रावलपिंडी में एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने शिया धर्मगुरुओं से कहा अगर आपको ईरान से इतना प्यार है तो वहां चले जाएं. इस बयान को शिया समुदाय ने अपमानजनक और भड़काऊ बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की भाषा देश में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है.
मुनीर के बयान पर शिया समुदाय ने विरोध जताया
इस बयान के बाद शिया मौलवियों में गुस्सा भर गया. कई धार्मिक लीडर्स ने पाकिस्तानी सेना पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका और इज़राइल के इशारे पर काम कर रही है. शिया उलेमा काउंसिल के नेताओं ने यहां तक कह दिया कि अगर सेना को अमेरिका-इजरायल से इतना लगाव है, तो उन्हें खुद पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए. इस बयानबाजी ने विवाद को और ज्यादा तीखा बना दिया है.
ईरान से जुड़े घटनाक्रम से विवाद बढ़ गया
दरअसल, यह पूरा मामला हाल ही में ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद शुरू हुआ. अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर के बाद, पाकिस्तान में शिया समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. कराची, इस्लामाबाद और स्कर्दू जैसे शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें करीब 35 लोगों की मौत और कई लोग घायल हो गए. इसके बाद सेना ने सख्ती दिखाई और विदेश से जुड़े मुद्दों पर देश में हिंसा को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी.
गो टू ईरान’ बयान पर शिया समुदाय भड़का
हालांकि, सेना का कहना था कि यह चेतावनी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी. लेकिन गो टू ईरान जैसे शब्दों ने शिया समुदाय को ठेस पहुंची. शिया नेताओं का कहना है कि उनकी भावनाओं को देशभक्ति से जोड़कर देखना गलत है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के निर्माण और विकास में शिया समुदाय का अहम योगदान रहा है. इसलिए उन्हें बाहरी बताना या उनकी वफादारी पर सवाल उठाना सही नहीं है.
पाकिस्तान में 3 बड़े मुद्दों पर टकराव
इस पूरे विवाद ने पाकिस्तान में तीन बड़े मुद्दों को एक साथ दिखाया. पहला है शिया-सुन्नी सांप्रदायिक तनाव, जो पहले से ही संवेदनशील रहा है. दूसरा है पाकिस्तान की विदेश नीति, जिसे लेकर अक्सर दोहरे मापदंड के आरोप लगते हैं. तीसरा और सबसे अहम मुद्दा है सेना की राजनीति में भूमिका, जिसे लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. इस विवाद ने यह दिखा दिया कि पाकिस्तान में धर्म, राजनीति और सेना के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल है.
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