अयातुल्ला अली खामेनेई का 24 घंटे बाद ही होना चाहिए था अंतिम संस्कार, 45 दिन बाद भी सुपुर्द-ए-खाक के इंतजार के क्या मायने हैं?

Ali Khamenei Funeral: विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय तक अली खामेनेई का अंतिम संस्कार न होना बताता है कि ईरान की सरकार डरी हुई है.

Published date india.com Published: April 13, 2026 8:22 AM IST
अयातुल्ला अली खामेनेई का 24 घंटे बाद ही होना चाहिए था अंतिम संस्कार, 45 दिन बाद भी सुपुर्द-ए-खाक के इंतजार के क्या मायने हैं?
(photo credit AI, for representation only)

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद डेढ महीने का वक्त बीच चुका है. मार्च की शुरुआत में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक के साथ उनका अंतिम संस्कार तय हुआ था, जो युद्ध के चलते टल गया. उसके बाद से अब तक अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार क्यों नहीं हुआ? आइये समझते हैं.

धर्म क्या कहता है

फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ईरानी अमेरिकन कम्युनिटीज (OIAC) के आर सेपेहरराद (Dr. Ramesh Sepehrrad) ने बताया, आमतौर पर, ऐसे धार्मिक शासन वाले लोगों का मानना ​​होता है कि उनके मृतकों को 24 घंटों के भीतर दफना दिया जाना चाहिए.

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तो क्या डर रही ईरान की सरकार

सेपेहरराद कहते हैं, 45 दिन बीत चुके हैं, और शासन में मोजतबा के मृत पिता अली खामेनेई को सार्वजनिक रूप से दफनाने का आत्मविश्वास नहीं है. यह ईरान के वर्तमान शासन के भीतर ऊपर से नीचे तक फैले डर का एक संकेत है. अयातुल्ला अली खामेनेई के दफनाने में हो रही लंबी देरी, इस्लामिक गणराज्य के भीतर गहराते संकट का संकेत है.

ईरान के भीतर क्या हैं हालात

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के नरमपंथी, जो ट्रंप के साथ समझौते पर जोर दे रहे हैं, उन्हें ‘खत्म’ किए जाने का खतरा है, क्योंकि शासन के भीतर दरारें गहरी होती जा रही हैं.

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सेपेहरराद ने बताया, मोजतबा पारंपरिक अर्थों में सर्वोच्च नेता कम और सुरक्षा-आधारित व्यवस्था के कोआर्डिनेटर ज्यादा हैं. यह शासन एक ही आवाज में बात नहीं करता है. यह अपने-अपने काम के हिसाब से बात करता है. एक पक्ष बातचीत करता है, दूसरा धमकी देता है, तीसरा सजा देता है, और चौथा वैचारिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश करता है. अब यह एक माफिया बन गया है.

मोजतबा खामेनेई ऐसा नेता जिसके पास स्वाभाविक अधिकार की कमी है, और इसलिए वह संस्थाओं के जरिए शासन करते हैं. ये संस्थाएं ही ईरान की ताकत को नियंत्रित करती हैं.

चालीसवें दिन हुई शोकसभा

ईरान में 9 अप्रैल को खामेनेई के लिए चालीसवें दिन की शोक सभा शुरू हुईं. लेकिन, ईरान के अधिकारियों ने उनकी हत्या के 40 से अधिक दिनों बाद भी उनके दफनाने के बारे में जानकारी रोक रखी थी.

28 फरवरी को हुई थी मौत

खामेनेई की हत्या 28 फरवरी को मध्य तेहरान में शासन के एक परिसर को निशाना बनाकर किए गए हमले में हुई थी इसी हमले में मोजतबा खामेनेई (56 वर्ष) को भी चोटें आई थीं, जिन्होंने उनके बाद सत्ता संभाली है. मोजतबा के करीबी तीन लोगों ने 11 अप्रैल को राइटर्स को बताया कि वह अभी भी चेहरे और पैरों की गंभीर चोटों से उबर रहे हैं.

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