ढाका. भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आगामी रविवार यानी 30 दिसंबर को आम चुनाव होने वाले हैं. चुनाव में पीएम शेख हसीना की पार्टी सत्तारूढ़ अवामी लीग और उसके सहयोगी दलों का मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के साथ है. बांग्लादेश में चुनाव से विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ पार्टी ‘भय का माहौल’ बना रही है. विपक्षी दलों का यह आरोप इसलिए चर्चा में आया है, क्योंकि उनका आरोप है कि चुनाव से पहले पुलिस ने 10 हजार से ज्यादा विपक्षी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने 10 हजार 500 से ज्यादा विपक्षी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार से रविवार को मुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए और प्रयास करने की अपील की है.

प्रधानमंत्री शेख हसीना एक बार फिर से चुनाव जीत कर रिकॉर्ड चौथी बार सरकार बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं. इसको लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं. विपक्षी दलों ने कहा कि 8 नवंबर को चुनाव की घोषणा के बाद की गई इन गिरफ्तारियों का मकसद ‘भय का माहौल’ उत्पन्न करना है. मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कहा कि उनके 7,021 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है. उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि उनके 3,500 से ज्यादा समर्थकों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस प्रवक्ता सोहेल राना ने हालांकि किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि पुलिस ने किसी वारंट के बगैर कोई ‘अनावश्यक’ गिरफ्तारी नहीं की है.

चुनाव आयोग पर भी लगाए आरोप
इससे पहले बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी बीएनपी-एनयूएफ गठबंधन के सदस्य मंगलवार को चुनाव आयोग की एक बैठक से उसके प्रमुख पर ‘अनुचित’ व्यवहार का आरोप लगाते हुए बाहर आ गए. गठबंधन का आरोप था कि चुनाव आयोग के प्रमुख चर्चा के दौरान उनके तर्कों पर ध्यान नहीं दे रहे थे. नेशनल यूनिटी फ्रंट (एनयूएफ) के संयोजक और प्रख्यात न्यायविद कमाल हुसैन के नेतृत्व में विपक्षी दल का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) नुरूल हुदा से गठबंधन समर्थकों की कथित गिरफ्तारी के संबंध में चर्चा करने के लिए लिए मिला था. बैठक में विपक्षी गठबंधन ने राजधानी में चुनाव से पहले अंतिम रैली आयोजित करने से रोकने का मुद्दा भी उठाया. विपक्षी गठबंधन ने पुलिस पर विपक्षी पार्टी के समर्थकों के साथ ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ करने का आरोप लगाया. बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरूल इस्लाम आलमगीर ने बैठक से आधे घंटे के भीतर बाहर निकलने के बाद कहा, ‘हम लोग बैठक से बाहर निकल गए क्योंकि सीईसी हमारी बातों पर विचार नहीं कर रहे थे और उनका व्यवहार अनुचित था.’

(इनपुट – एजेंसी)