Bangladesh Crisis: उस्मान हादी केस में ढाका पुलिस का बड़ा दावा, कहा- मेघालय बॉर्डर के रास्ते भारत आए 2 हत्यारे

Osman Hadi Murder Case: ढाका पुलिस ने उस्मान हादी हत्या मामले में बड़ा दावा किया है. पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड में शामिल दो आरोपी बांग्लादेश से फरार होकर मेघालय सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हो गए हैं.

Published date india.com Published: December 28, 2025 4:43 PM IST
Bangladesh Crisis: उस्मान हादी केस में ढाका पुलिस का बड़ा दावा, कहा- मेघालय बॉर्डर के रास्ते भारत आए 2 हत्यारे

Osman Hadi Murder Case: ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस ने दावा किया है कि बांग्लादेश के राजनीतिक कार्यकर्ता उस्मान हादी की हत्या मामले के दो मुख्य आरोपी वारदात के बाद मेघालय सीमा के रास्ते भारत भाग आए हैं. यह खबर बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट में सामने आई है. ढाका पुलिस मीडिया सेंटर में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एडिशनल कमिश्नर एसएन नजरुल इस्लाम ने बताया कि आरोपी फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख स्थानीय लोगों की मदद से मयमनसिंह के हलुआघाट बॉर्डर से भारत में दाखिल हुए.

उन्होंने कहा कि पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार सीमा पार करने के बाद दोनों आरोपियों को पहले ‘पुर्ति’ नाम के व्यक्ति ने रिसीव किया. इसके बाद ‘सामी’ नाम का टैक्सी ड्राइवर उन्हें मेघालय के तुरा शहर तक लेकर गया. नजरुल इस्लाम ने यह भी बताया कि पुलिस को अनौपचारिक सूचना मिली है कि आरोपियों की मदद करने वाले दोनों लोगों को भारतीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है.

आधिकारिक पुष्टि नहीं

उन्होंने कहा, ‘हम आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारियों से औपचारिक और अनौपचारिक, दोनों माध्यमों से लगातार संपर्क में हैं.’ नजरुल इस्लाम ने बताया कि बांग्लादेशी अधिकारियों को अनौपचारिक जानकारी मिली है कि पुर्ति और सामी दोनों को भारतीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

भारत के संपर्क में बांग्लादेश सरकार

उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश सरकार फरार आरोपियों को वापस लाने के लिए भारत के संपर्क में है और उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण को लेकर दोनों देशों के बीच औपचारिक और अनौपचारिक स्तर पर बातचीत चल रही है. उस्मान हादी बांग्लादेश के एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे और भारत और अवामी लीग के मुखर आलोचक माने जाते थे. वह पिछले साल हुए हिंसक छात्र आंदोलन ‘जुलाई विद्रोह’ के प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जिसके बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी.

इस आंदोलन के बाद हादी ने ‘इंकिलाब मंचा’ नाम से एक राजनीतिक मंच बनाया और फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. 12 दिसंबर को ढाका में नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां छह दिन बाद उनकी मौत हो गई.

हादी की हत्या के बाद ढाका और देश के अन्य हिस्सों में व्यापक हिंसा भड़क उठी. भीड़ ने राजधानी में बड़े अखबार प्रथम आलो और द डेली स्टार के दफ्तरों के साथ-साथ सांस्कृतिक संगठनों छायानट और उदिची शिल्पी गोष्ठी को आग के हवाले कर दिया. हालात और बिगड़ गए जब मध्य बांग्लादेश के मयमनसिंह में एक हिंदू फैक्ट्री मजदूर को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, जिससे हादी की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया.

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