नई दिल्ली. बांग्लादेश में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने वाली अवामी लीग पार्टी की प्रमुख और देश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी ऐतिहासिक जीत को भारत में हुए चुनावों और यहां के राजनीतिक दलों के प्रदर्शन से जोड़कर देखती हैं. इसलिए सत्ता में आने के बाद पहली बार देशी-विदेशी संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने खुले तौर पर कहा, ‘मेरी यह जीत भारतीय जनता पार्टी की तरह की जीत है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी की तरह हार गए’. देश की संसद की 80 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद शेख हसीना का यह अंदाज भले मजाकिया लग रहा हो, लेकिन वे इसे तथ्यात्मक तरीके से रखती हैं. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहती हैं कि इन दलों के पास भी मौका है कि वह अगली बार जमीन से ऊपर उठने का तरीका खोजें.

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विपक्षी दल सीखें कैसे 2 सीटों के रास्ते सत्ता मिलती है
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित अपने आधिकारिक आवास गोनो भवन में पत्रकारों से बात करते हुए शेख हसीना ने देश में हुए चुनाव की तुलना भारत में 2014 में हुए आम चुनावों से की. मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि बीएनपी की चुनावी हार उनकी अपनी खामियों और कमजोरियों के कारण हुआ है, लेकिन एक वजह यह भी है कि लोग नहीं जानते थे कि उनका नेता कौन है. शेख हसीना ने इस स्थिति की तुलना भारत में 2014 में हुए आम चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी की स्थिति से की. उन्होंने कहा, ‘लोकसभा चुनाव में भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस में यह तय नहीं था कि उनका कौन सा नेता प्रधानमंत्री बनेगा. कांग्रेस यह तय नहीं कर पाई थी कि उनका नेता कौन है, इसी वजह से चुनावों में लोगों ने पार्टी को वोट नहीं दिया. इसका नतीजा था कि कांग्रेस को बहुत कम सीटों पर ही जीत मिल सकी.’

इसके साथ ही शेख हसीना अपनी जीत को भारत में भाजपा के उत्थान और सबसे बड़े दल के रूप में सत्ता तक पहुंचने से भी जोड़ती हैं. इस बारे में शेख हसीना ने कहा, ‘क्या आपको याद है कि राजीव गांधी जब भारी बहुमत के साथ जीतकर सत्ता में आए थे, तो बीजेपी महज 2 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी, लेकिन आज यह पार्टी सत्ता में है.’ भाजपा का उदाहरण देते हुए हसीना यह याद दिलाना नहीं भूलतीं कि बांग्लादेश के विपक्षी दल भी भाजपा से सीख लें कि किस तरह सिर्फ 2 सीटों पर जीतने वाली पार्टी एक दिन देश में सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है.

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विपक्षी पार्टी बीएनपी ने कहा- शपथ नहीं लेंगे सांसद
पड़ोसी देश बांग्लादेश में वर्ष 2018 के अंतिम दिन संसदीय चुनावों के परिणाम आए. विपक्षियों और सत्तारूढ़ दल के बीच भारी विरोधों के बीच हुए चुनावों के परिणाम पूरी दुनिया को चौंकाने वाले रहे. इन ऐतिहासिक परिणामों में देश में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और उसके सहयोगी दलों को कुल 298 सीटों में से 288 पर जीत हासिल हुई है. वहीं सरकार पर भ्रष्टाचार और चुनावों में धांधली के आरोप लगाने वाली बीएनपी और अन्य सहयोगी दलों को महज 7 सीटों से संतोष करना पड़ा. इसके अलावा 3 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीती हैं. बांग्लादेश की संसद में कुल 300 सीटें हैं, जिनमें से एक सीट पर मतदान रद्द कर दिया गया था, वहीं दूसरी सीट पर उम्मीदवार की मौत के चलते चुनाव नहीं हुए.

हालांकि विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ अवामी लीग पर चुनाव में धांधली करने, उनके कार्यकर्ताओं को धमकाने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए दोबारा से चुनाव कराने की मांग की है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इन मांगों को खारिज कर दिया है. बांग्लादेश के अखबारों के अनुसार, मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी इन चुनाव परिणामों को नहीं मानती, इसलिए चुनाव में 7 सीटों पर जीत दर्ज करने वाले सांसद शपथ ग्रहण नहीं करेंगे.