PM से ज्यादा ताकतवर राष्ट्रपति, नागरिकों को मिलेगी नई पहचान... समझिए जुलाई चार्टर से कितना बदल जाएगा बांग्लादेश

बांग्लादेश का जुलाई चार्टर 2025 देश के संवैधानिक और राजनीतिक सुधार का एक दस्तावेज है. इसका मकसद बांग्लादेश की लोकतंत्र को मजबूत करना, पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना है. इसपर आम सहमति जानने के लिए जनमत संग्रह किया गया था.

Published date india.com Updated: February 13, 2026 6:53 PM IST
PM से ज्यादा ताकतवर राष्ट्रपति, नागरिकों को मिलेगी नई पहचान... समझिए जुलाई चार्टर से कितना बदल जाएगा बांग्लादेश
जुलाई चार्टर पर 68.06% वोट 'हां' के पक्ष में गए हैं.32.27% ने 'नहीं'ऑप्शन चुना था.

बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP (Bangladesh Nationalist Party) की सरकार बनने जा रही है. 58 साल के तारिक रहमान जल्द ही प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. रहमान पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं. चुनाव से 2 महीने पहले पूरे 17 साल बाद वो लंदन से ढाका लौटे थे. रहमान सरकार में बांग्लादेश कई तरह के बदलाव को भी अपनाएगा. पावर बैलेंस को बनाए रखने के लिए बांग्लादेश जुलाई चार्टर की बातें भी लागू होंगी.

दरअसल, बांग्लादेश में राजनीतिक और संवैधानिक सुधार लाने के लिए नेशनल कंसेंशन कमीशन बनाया गया.अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसके चेयरमैन बने. इस कमीशन के 5 अलग-अलग कमीशन ने 33 पॉलिटिकल पार्टियों और अलायंस से 72 मीटिंग कर 166 सिफारिशों पर चर्चा की. इसके बाद ‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025‘ तैयार हुआ. इसमें 84 सिफारिशें शामिल थीं.

बांग्लादेश में शुरू हो रहा रहमान काल, चीन-पाकिस्तान के लिए क्या हैं इसके मायने? भारत को अपने रूठे पड़ोसी को मनाना क्यों जरूरी?

जुलाई चार्टर पर 12 फरवरी को हुआ जनमत संग्रह
12 फरवरी को जनरल इलेक्शन के साथ ही जुलाई नेशनल चार्टर पर भी वोटिंग हुई थी.जुलाई चार्टर पर 68.06% वोट ‘हां’ के पक्ष में गए हैं.32.27% ने ‘नहीं’ऑप्शन चुना था.

चौथे जनमत संग्रह में 60.26% वोटिंग
बांग्लादेश के चुनाव आयोग की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक,गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव के साथ आयोजित जनमत संग्रह में कुल 70,640,056 लोगों ने मतदान किया. देश के इतिहास में चौथे जनमत संग्रह में 60.26% वोटिंग हुई. इस दौरान कुल 48,074,429 वोट ‘हां’ के पक्ष में पड़े. 22,565,627 वोट ‘नहीं’ के पक्ष में पड़े हैं. ये नतीजे जुलाई के नेशनल चार्टर में शामिल संवैधानिक सुधार के 48 पॉइंट्स को लागू करने के लिए जनता की सहमति को दिखाता है.

12 फरवरी को जनरल इलेक्शन के साथ ही जुलाई नेशनल चार्टर पर भी वोटिंग हुई थी. (AP)

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

जुलाई चार्टर के लागू होने के बाद बांग्लादेश में क्या-क्या बदलेगा?

पावर बैलेंसिंग: जुलाई चार्टर के हिसाब से बांग्लादेश में पावर बैलेंसिंग होगी. प्रधानमंत्री की शक्तियों को कम करके राष्ट्रपति की ताकत बढ़ाई जाएगी. जातीय संसद को ज्यादा शक्तिशाली बनाया जाएगा, ताकि सत्ता का केंद्रीकरण न हो सके.

PM बनने की लिमिट: जुलाई चार्टर के लागू होने के बाद बांग्लादेश में PM बनने की लिमिट सेट हो जाएगी. कोई भी व्यक्ति मैक्सिमम 2 बार यानी ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक ही PM बना रह सकता है.शेख हसीना 15 साल PM रहीं. बांग्लादेश का मानना है कि लॉन्ग टर्म से करप्शन को बढ़ावा मिलता है.

Explainer: शेख हसीना के बाद यूनुस या रहमान? 12 फरवरी को लिखी जाएगी बांग्लादेश की किस्मत, जानें आपके हर सवाल का जवाब

भारत की तरह राज्यसभा का होगा गठन: अब तक बांग्लादेश की संसद ‘जातीय संसद’ में एक ही सदन है. लेकिन, जुलाई चार्टर लागू होने के बाद अब यहां की संसद में राज्यसभा का कॉन्सेप्ट आएगा. भारत की राज्यसभा की तरह बांग्लादेश में 100 सीटों वाला ‘अपर हाउस’ बनेगा, जो निचले सदन के फैसलों को रिव्यू करेगा. भारत की राज्यसभा में सीटों की संख्या 250 है.

नागरिकों को मिलेगी नई पहचान: जुलाई चार्टर में नागरिकों को नई पहचान दी गई है. बांग्लादेश के संविधान में यहां के नागरिकों की परिभाषा ‘बंगाली’ (भाषाई पहचान) है. इसे अब ‘बांग्लादेशी’ (नागरिक पहचान) लिखा जाएगा. इसके साथ ही सभी मातृभाषाओं को बंगाली के साथ राज्य भाषा का दर्जा दिया जाएगा.

‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025′ में 84 सिफारिशें शामिल थीं. (AP)

चुनाव आयोग को ज्यादा ताकत: जुलाई चार्टर में बांग्लादेश के चुनाव आयोग की ताकत भी बढ़ाई गई है. चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो, इसलिए चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वायत्त बनाया जाएगा. EC के पास अपनी अलग बजट और प्रशासनिक शक्ति होगी.

जजों के अपॉइंटमेंट के लिए बनेगा कमीशन: बांग्लादेश में अब तक जजों को प्रधानमंत्री अपॉइंट करते हैं. लेकिन, जुलाई चार्टर के मुताबिक जजों की नियुक्ति को लिए अलग से कमीशन बनेगा. इससे अदालतों पर सरकार का कंट्रोल खत्म होगा. फैसले निष्पक्ष तरीके से हो सकेंगे.

कौन हैं तारिक रहमान? बांग्लादेश PM पद के प्रबल दावेदार, कहा जाता है ‘डार्क प्रिंस’! जानिए कितने अमीर

हर चुनाव से पहले केयरटेकर सरकार: जुलाई चार्टर में ये पॉइंट पाकिस्तान से लिया गया लगता है. पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के चुनाव से पहले एक केयरटेकर सरकार बनती है. इसी तर्ज पर अब बांग्लादेश भी काम करेगा. वहां हर चुनाव से पहले चुनी हुई सरकार इस्तीफा देगी. फिर एक निष्पक्ष ‘केयरटेकर सरकार’ चुनाव कराएगी. इससे सत्ताधारी पार्टी के चुनाव में धांधली करने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.

तारिक रहमान को प्रिंस ऑफ बोगरा के नाम से जाना जाता है. (AP)

सांसद मर्जी से वोट दे सकेंगे: जुलाई चार्टर में संविधान के आर्टिकल 70 में करेक्शन की बात कही गई है. इसके तहत अब सांसद अपनी मर्जी से वोट डाल पाएंगे. उन्हें वोट के लिए उनकी पार्टी फोर्स नहीं कर सकती. फैसलों से इत्तेफाक नहीं रखने पर सांसद अपनी पार्टी के खिलाफ वोट दे पाएंगे. पहले ऐसा करने पर सदस्यता चली जाती थी. हालांकि, जुलाई चार्टर में बजट और अविश्वास प्रस्ताव पर पार्टी लाइन मानने पर जोर दिया गया है.

अब आगे क्या?
जनमत संग्रह के वोटिंग रिजल्ट के हिसाब से अब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर लागू होगा. नई संसद पहले 180 दिनों तक एक ‘संवैधानिक सुधार परिषद’ की तरह काम करेगी. इस दौरान चार्टर की सिफारिशों को कानून में बदला जाएगा.

तारिक रहमान हमारे दोस्त हैं या दुश्मन, बांग्लादेश में BNP की जीत से भारत को फायदा होगा या नुकसान?

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें EXPLAINERS की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.