Bangladesh Protest:  6314 दिनों बाद ढाका की जमीं पर खालिदा के बेटे तारीक रहमान ने रखे पैर, अभी और जलेगा बांग्लादेश या जख्मों पर लगेगा मरहम?

बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं. शेख हसीना भारत में राजनयिक शरणार्थी के तौर पर रह रही हैं. खालिदा जिया बीमारी के चलते वेंटिलेटर पर लेटी हैं. मोहम्मद यूनुस के हाथ से चीजें निकलती जा रही हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले PM दावेदार हो सकते हैं.

Published date india.com Published: December 25, 2025 5:26 PM IST
khaleda zia son tariq Rahman
तारिक रहमान, जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे हैं.

भारत के पड़ोसा देश बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल से पैदा हुई हिंसा की आग में झुलस रहा है. हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं. शुक्रवार (25 दिसंबर)को क्रिसमस के मौके पर रहमान ने ढाका की जमीं पर अपने पैर रखें. वो कुल 6314 दिनों के निर्वासन के बाद अपने वतन लौटे हैं. 2008 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और उनके बेटे तारिक रहमान के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं. गिरफ्तारी का ऑर्डर जारी होने वाला था. इससे बचने के लिए तारिक रहमान 2008 में ही लंदन भाग गए थे. अब रहमान देश में हैं, जबकि 80 साल की खालिदा जिया वेंटिलेटर पर हैं.

आइए जानते हैं बांग्लादेश लौटने पर तारिक रहमान ने क्या मैसेज दिया? तारिक रहमान के लौटने से किसे फायदा होगा? बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा? मौजूदा हिंसा और असंतोष के माहौल मे तारिक रहमान के आने से हालात और बिगड़ेंगे या हिंसा की आग के जल रहे बांग्लादेश के जख्मों पर कुछ मरहम लगेगा:-

पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए

  • तारिक रहमान, जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे हैं. जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति रह चुके हैं, जबकि खालिदा जिया प्रधानमंत्री रह चुकी हैं. उनकी पत्नी का नाम जुबैदा रहमान है.
  • उनपर भ्रष्टाचार के 84 मामले हैं. 2007 में उन्हें इन मामलों में सजा हुई थी. सजा से बचने के लिए वो 2008 में ही लंदन भाग गए थे. तब से अब तक वहीं रह रहे थे.
  • उन्हें 2018 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था.
  • 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद तारिक रहमान कई मामलों से बरी हो गए हैं. फिलहाल वो 3 दिन के लिए बांग्लादेश में रहेंगे.

बांग्लादेश लौटकर तारिक रहमान ने क्या कहा?

  • एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही तारिक रहमान ने अपने जूते उतार दिए और नंगे पैर ही एयरपोर्ट के बाहर जमीन पर खड़े हुए. उन्होंने मुट्ठीभर मिट्टी उठाया और उसे हल्के से छूआ. तारिक रहमान के स्वागत में ढाका में BNP ने एक रैली कराई. इसमें 1 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुटे थे. रहमान ने रैली को संबोधित किया. उन्होंने भाषण में कहा, हम देश में शांति कायम करेंगे. नया बांग्लादेश बनाएंगे. इस दौरान उन्होंने शेख हसीना को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा.
  • तारिक ने कहा, चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, बांग्लादेश की शांति और गरिमा को बनाए रखना हमेशा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. हम सब मिलकर काम करेंगे और अपने बांग्लादेश का निर्माण करेंगे.
  • उन्होंने कहा, मेरे पास अपने देश को बेहतर बनाने के लिए एक प्लान है. हम इस प्लान पर मिलकर काम करेंगे. इस बीच रहमान ने अमेरिका के प्रसिद्ध बैप्टिस्ट पादरी, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और अहिंसक आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जिक्र किया.

तारिक रहमान के लौटने से किसे फायदा किसे नुकसान?
तारिक रहमान के लौटने से जाहिर तौर पर BNP को ही फायदा होगा. उसकी राजनीतिक जड़ें मजबूत होंगी. मोहम्मद यूनुस भी अपनी कार्यवाहक सरकार को बनाए रखने और आंदोलन को खत्म करने में रहमान की मदद ले सकते हैं. रहमान के जरिए BNP चुनाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी.

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दूसरी ओर, रहमान के आने से शेख हसीना की अवामी लीग को नुकसान होने वाला है. आवामी लीग के छात्र संगठन ने तारिक की वापसी को लेकर BNP पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि तारिक रहमान की घर वापसी से देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी. इस वापसी का एक ही मकसद है एकतरफा चुनाव करवाना.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, बांग्लादेश स्टूडेंट्स लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने इसे “फासीवादी राजनीति” करार दिया. हुसैन ने कहा, ” तारिक की वापसी से बांग्लादेश की समस्याएं हल नहीं होंगी. इससे एकतरफा चुनाव होंगे और फासीवादी राजनीति जारी रहेगी.

रहमान के लौटने से बांग्लादेश चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
जून में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपनी यूके की यात्रा के दौरान तारिक रहमान से मुलाकात की थी. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद से उन्हें बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है. तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की उम्र 80 साल है. फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं. ऐसे में साफ है कि खालिदा जिया फरवरी में होने वाले इलेक्शन में न तो हिस्सा ले सकती हैं और न ही चुनाव प्रचार कर सकती हैं. ऐसे में साफ है कि तारिक BNP की कमान अपने हाथ में ले सकते हैं.

दूसरी ओर, शेख हसीना की पार्टी पर बैन लगने के बाद BNP बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी मानी जा रही है. वहीं, अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार ने जमात-ए-इस्लामी से बैन हटा दिया था. जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन से जुड़े युवाओं ने हसीना के देश छोड़ने के बाद नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया. ऐसे में अवामी लीग के चुनावी मैदान में न होने के बाद BNP के सामने NCP ही एकमात्र प्रमुख चुनौती मानी जा रही है.

भारत के लिए क्या चुनौती?
बांग्लादेश को भारत ने बनाया है. भारत ने हर तरह के क्राइसिस में बांग्लादेश के लिए एक अच्छा पड़ोसी होने का सबूत दिया है. लेकिन, मौजूदा हालात को देखते हुए भारत को अपनी डिप्लोमेसी में बदलाव करने की जरूरत है. पिछला रिकॉर्ड खंगाले तो समझ में आता है कि तारिक रहमान को अगर पूरे बांग्लादेश की कमान मिल गई, तो इस्लामिक कट्टरपंथियों को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में बांग्लादेशी सीमा से लगे राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की सुरक्षा करना भारत के लिए प्रमुख चुनौती होगी.

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