
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
भारत के पड़ोसा देश बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल से पैदा हुई हिंसा की आग में झुलस रहा है. हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं. शुक्रवार (25 दिसंबर)को क्रिसमस के मौके पर रहमान ने ढाका की जमीं पर अपने पैर रखें. वो कुल 6314 दिनों के निर्वासन के बाद अपने वतन लौटे हैं. 2008 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और उनके बेटे तारिक रहमान के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं. गिरफ्तारी का ऑर्डर जारी होने वाला था. इससे बचने के लिए तारिक रहमान 2008 में ही लंदन भाग गए थे. अब रहमान देश में हैं, जबकि 80 साल की खालिदा जिया वेंटिलेटर पर हैं.
आइए जानते हैं बांग्लादेश लौटने पर तारिक रहमान ने क्या मैसेज दिया? तारिक रहमान के लौटने से किसे फायदा होगा? बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा? मौजूदा हिंसा और असंतोष के माहौल मे तारिक रहमान के आने से हालात और बिगड़ेंगे या हिंसा की आग के जल रहे बांग्लादेश के जख्मों पर कुछ मरहम लगेगा:-
पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए
बांग्लादेश लौटकर तारिक रहमान ने क्या कहा?
तारिक रहमान के लौटने से किसे फायदा किसे नुकसान?
तारिक रहमान के लौटने से जाहिर तौर पर BNP को ही फायदा होगा. उसकी राजनीतिक जड़ें मजबूत होंगी. मोहम्मद यूनुस भी अपनी कार्यवाहक सरकार को बनाए रखने और आंदोलन को खत्म करने में रहमान की मदद ले सकते हैं. रहमान के जरिए BNP चुनाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी.
दूसरी ओर, रहमान के आने से शेख हसीना की अवामी लीग को नुकसान होने वाला है. आवामी लीग के छात्र संगठन ने तारिक की वापसी को लेकर BNP पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि तारिक रहमान की घर वापसी से देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी. इस वापसी का एक ही मकसद है एकतरफा चुनाव करवाना.
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, बांग्लादेश स्टूडेंट्स लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने इसे “फासीवादी राजनीति” करार दिया. हुसैन ने कहा, ” तारिक की वापसी से बांग्लादेश की समस्याएं हल नहीं होंगी. इससे एकतरफा चुनाव होंगे और फासीवादी राजनीति जारी रहेगी.“
रहमान के लौटने से बांग्लादेश चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
जून में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपनी यूके की यात्रा के दौरान तारिक रहमान से मुलाकात की थी. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद से उन्हें बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है. तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की उम्र 80 साल है. फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं. ऐसे में साफ है कि खालिदा जिया फरवरी में होने वाले इलेक्शन में न तो हिस्सा ले सकती हैं और न ही चुनाव प्रचार कर सकती हैं. ऐसे में साफ है कि तारिक BNP की कमान अपने हाथ में ले सकते हैं.
दूसरी ओर, शेख हसीना की पार्टी पर बैन लगने के बाद BNP बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी मानी जा रही है. वहीं, अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार ने जमात-ए-इस्लामी से बैन हटा दिया था. जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन से जुड़े युवाओं ने हसीना के देश छोड़ने के बाद नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया. ऐसे में अवामी लीग के चुनावी मैदान में न होने के बाद BNP के सामने NCP ही एकमात्र प्रमुख चुनौती मानी जा रही है.
भारत के लिए क्या चुनौती?
बांग्लादेश को भारत ने बनाया है. भारत ने हर तरह के क्राइसिस में बांग्लादेश के लिए एक अच्छा पड़ोसी होने का सबूत दिया है. लेकिन, मौजूदा हालात को देखते हुए भारत को अपनी डिप्लोमेसी में बदलाव करने की जरूरत है. पिछला रिकॉर्ड खंगाले तो समझ में आता है कि तारिक रहमान को अगर पूरे बांग्लादेश की कमान मिल गई, तो इस्लामिक कट्टरपंथियों को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में बांग्लादेशी सीमा से लगे राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की सुरक्षा करना भारत के लिए प्रमुख चुनौती होगी.
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