अमेरिका ने बंद कर दिए थे ये सिक्के, आखिरी तीन कॉइन हुए 7 करोड़ में नीलाम

अमेरिका में पेनी जिसे एक सेंट का सिक्का भी कहा जाता है इसका उत्पादन हमेशा के लिए यहां बंद कर दिया गया. 232 साल पुरानी इस परंपरा का अंत करते हुए यूएस मिंट ने आखिरी सिक्कों की नीलामी की तो इसने इतिहास रच दिया.

Published date india.com Published: December 20, 2025 11:55 AM IST
penny currency pictures (1)

यूएस मिंट ने अमेरिका में एक सेंट (Penny) सिक्के के उत्पादन पर हमेशा के लिए रोक लगा दी है. क्योंकि इसकी वैल्यू से ज्यादा इसे बनाने में खर्च हो रहा था. बता दें कि एक सेंट को बनाने में 3.7 सेंट का खर्चा हो रहा था. जो देश के लिए घाटे का सौदा था. ऐसे में नवंबर 2025 में आखिरी पेनी को बनाया गया जिसपर स्पेशल ओमेगा (Ω) प्रिवी का मार्क छापा गया. बता दें कि ओमेगा ग्रीक वर्णमाला का आखिरी अक्षर, है जिसे अंत का प्रतीक माना जाता है.

यूएस मिंट ने इन आखिरी सिक्कों की नीलामी का आयोजन किया जिसने की इतिहास रच दिया. बता दें कि बीते दिनों स्टैक्स बोवर्स गैलरीज़ ने यूएस मिंट की तरफ से 232 थ्री-कॉइन सेट्स की नीलामी की थी. जिसके हर सेट में तीन सिक्के थे. जिनका नाम था फिलाडेल्फिया मिंट का 2025 पेनी, डेनवर मिंट का 2025-D पेनी और एक 24 कैरेट गोल्ड पेनी. इसकी कुल नीलामी 7 करोड़ रुपये में हुई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. इसके अलावा इस नीलामी में कुछ टॉप सेट्स 1 लाख डॉलर जो की करीब 84 लाख रुपये से ज्यादा में बिके. इसके फाइनल सेट नंबर 232, जिसमें ओरिजिनल डाइज भी शामिल थे, वो करीब 8 लाख डॉलर यानी करीब 6.7 करोड़ रुपये में बिके. जो कि रिकॉर्ड तोड़ साबित हुआ.

कब शुरुआत हुई थी इस सिक्के की?

अमेरिका में पेनी की शुरुआत साल 1793 में हुई थी, तब इसकी वैल्यू केवल इतनी ही थी कि इससे बिस्किट या कैंडी खरीदी जा सके. लेकिन अब ये सिक्के केवल लोगों के ड्रॉअर्स में पड़े रहते हैं. लेकिन कलेक्टर्स के लिए ये इतिहास का हिस्सा हैं. इसको लेकर स्टैक्स बोवर्स के प्रेसिडेंट ब्रायन केंड्रेला ने कहा, इन सिक्कों ने पब्लिक इमेजिनेशन को जैसे कब्जा किया, वैसा कम ही देखा.’

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अब तक की सबसे ऊंची नीलामी

इस नीलामी को लेकर स्टैक्स बोवर्स में न्यूमिजमैटिक अमेरिकना के निदेशक जॉन क्रालजेविच ने कहा, मैं 40 वर्षों से सिक्कों की नीलामी में जा रहा हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा, क्योंकि ऐसा पहले कभी हुआ ही नहीं है. ये उस तरह की नीलामी थी जहां बोली लगाने तक आपको वस्तुओं का बाजार मूल्य पता नहीं चलता.

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