इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि भारत की सत्तारूढ़ बीजेपी का दृष्टिकोण मुस्लिम-विरोधी, पाकिस्तान-विरोधी है. उन्होंने दावा किया कि अगले आम चुनाव की वजह से नई दिल्ली उसके सभी प्रस्तावों को ठुकरा देती है. खान ने गुरुवार को वॉशिंगटन पोस्ट को दिए साक्षात्कार में यह बात कही. उनसे जब पूछा गया कि उनके सत्ता में आने के बाद से भारत उनके प्रस्ताव को क्यों अस्वीकार कर रहा है, पर उन्होंने कहा, “भारत की सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम-विरोधी, पाकिस्तान-विरोधी दृष्टिकोण रखती है.”

अगर इमरान खान के इस बयान को भारतीय नजरिए से देखा जाए तो ये बेहद आपत्‍त‍िजनक है. पाकिस्‍तान भारतीय मुस्‍लिमों के मन में यहां की सरकार के प्रति विरोधी भावनाओं को हवा देने की कोशिश की तरह है. इमरान खान आखिर बीजेपी को मुस्‍लिम विरोधी बताकर क्‍या साबित करना चाहते हैं. पाकिस्‍तान विरोधी सरकार बताकर क्‍या वे ये कहना चाहते हैं कि भारत की कुछ सरकारें मुस्‍लिम के लिए खास हैं और पाकिस्‍तान के लिए भी. पाकिस्‍तान के पीएम ऐसे बयान देकर भारतीय मुस्‍लिमों को वर्तमान सरकार विरोधी साबित करने की क्‍या यह नाकाम कोशिश नहीं है.

चुनाव खत्म हो जाएगा, तब दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती
इमरान ने दावा किया कि भारत ने शांति बहाली के लिए उनकी ओर से बार-बार की गई पहल को ठुकरा दिया, क्योंकि 2019 में आम चुनाव होना है. उन्‍होंने कहा, “भारत में चुनाव होने वाला है, शायद इसीलिए उन्होंने मेरे सारे प्रस्तावों को ठुकरा दिया.” खान ने उम्मीद जताई कि जब आम चुनाव खत्म हो जाएगा, तब दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है.
करतारपुर सीमा को खोलने को भारत ने राजनीतिक रंग की कोशिश की 
करतारपुर कॉरिडोर के बारे में बात करते हुए खान ने पोस्ट से कहा कि उन्होंने करतारपुर सीमा इसलिए खोला, ताकि भारतीय सिख श्रद्धालु बिना वीजा के ही करतारपार साहिब गुरुद्वारा में मत्था टेकने आ सके, जहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए थे. इससे एक दिन पहले खान ने करतारपुर सीमा को खोले जाने की उनकी पहल को भारत सरकार द्वारा राजनीतिक रंग देने की कोशिश किए जाने पर तंज कसा और इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया था.
भारतीय मीडिया ने करतारपुर कॉरिडोर को राजनीतिक रंग दिया
इमरान ने कहा, “भारतीय मीडिया ने करतारपुर कॉरिडोर को एक राजनीतिक रंग दे दिया, इससे ऐसा लगा कि हम राजनीतिक फायदा उठाना चाहते थे. यह सच नहीं है. हमने ऐसा किया, क्योंकि यह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के घोषणापत्र में था.”

मुंबई हमले के मामले का सुलझना हमारे हित में
पाकिस्तानी नेता ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि ‘मुंबई में बम बरसाने वालों के खिलाफ कुछ किया जाए.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले का सुलझना हमारे हित में होगा, क्योंकि यह आतंकवाद की कार्रवाई थी.

मुंबई हमले में 166 लोगों की हत्‍याएं हुईं थीं
बता दें कि 2008 में 10 पाकिस्तानी आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई आ गए थे और 166 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें कुछ विदेशी भी शामिल थे. भारतीय सुरक्षा बलों ने हालांकि 10 में से नौ को ढेर कर दिया था और एक बचे आतंकवादी को बाद में फांसी दे दी गई थी.