ऑक्सफोर्ड: एक सस्ती और व्यापक रूप से उपलब्ध दवा कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार रोगियों के जीवन को बचाने में मदद कर सकती है, ये दावा है ब्रिटेन के विशेषज्ञों का. ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि पहला ऐसा प्रमाण मिला है कि एक दवा कोविड-19 के मरीजों को बचाने में कारगर हो सकती है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक पुरानी और सस्ती दवा है जो कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार काफी लोगों की जान बचाने में सफल हुई है. इस दवा का नाम है- Dexamethasone. Also Read - UP: कानपुर एनकाउंटर में बड़ी कार्रवाई, चौबेपुर थाने के सभी 68 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

डेक्सामेथासोन नामक स्टेराइड के इस्तेमाल से गंभीर रूप से बीमार मरीजों की मृत्यु दर एक तिहाई तक घट गई. Dexamethasone दवा की हल्की खुराक से ही कोरोना से लड़ने में मदद मिलती है. ट्रायल के दौरान पता चला कि वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों को ये दवा दिए जाने पर मौत का खतरा एक तिहाई घट गया. Also Read - कोरोना: मुंबई में दो महीने बाद थोड़ी राहत, एक दिन में सबसे कम 806 नए मामले सामने आए

मंगलवार को इसके नतीजों की घोषणा की गई और जल्द ही अध्ययन को प्रकाशित किया जाएगा. अध्ययन के मुताबिक सख्ती से जांच करने और औचक तौर पर 2104 मरीजों को दवा दी गई और उनकी तुलना 4321 मरीजों से की गई, जिनकी साधारण तरीके से देखभाल हो रही थी. Also Read - यूपी: STF के डीआईजी अनंत देव का ट्रांसफर, 8 पुलिस वालों की जान लेने वाले विकास दुबे के करीबियों के साथ तस्वीरें हुई थीं वायरल

दवा के इस्तेमाल के बाद श्वसन संबंधी मशीनों के साथ उपचार करा रहे मरीजों की मृत्यु दर 35 प्रतिशत तक घट गई. जिन लोगों को ऑक्सीजन की सहायता दी जा रही थी उनमें भी मृत्यु दर 20 प्रतिशत कम हो गई. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता पीटर होर्बी ने एक बयान में कहा, ‘‘ये काफी उत्साहजनक नतीजे हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मृत्यु दर कम करने में और ऑक्सीजन की मदद वाले मरीजों में साफ तौर पर इसका फायदा हुआ. इसलिए ऐसे मरीजों में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल होना चाहिए. डेक्सामेथासोन दवा महंगी भी नहीं है और दुनियाभर में जान बचाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है.’’

हाल में इसी अध्ययन में कहा गया था कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना वायरस के उपचार में उपयोगी नहीं है. अध्ययन के तहत इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में 11,000 से ज्यादा मरीजों को शामिल किया गया था.

(इनपुट भाषा)