लंदन: ब्रिटेन के सांसद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ब्रेक्जिट करार पर ऐतिहासिक मतदान करने के लिए शनिवार को एकत्र हुए. इस मतदान से तय होगा कि ब्रिटेन इस महीने यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा या देश एक बार फिर नयी अनिश्चितता में घिर जाएगा. वर्ष 1982 में फाकलैंड युद्ध पर चर्चा करने के बाद पहली बार यूरोपीय संघ से अलग होने की शर्तों को लेकर जॉनसन एवं ईयू नेताओं के बीच बनी सहमति पर चर्चा करने के लिए शनिवार को ब्रिटिश संसद की बैठक बुलाई गई है. विपक्षी दलों और उत्तरी आयरलैंड के जॉनसन के अपने सहयोगियों ने इस करार को खारिज किया है लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले 48 घंटों में अथक प्रयास किए हैं.

मतदान में किस पक्ष में मत डाल जाएंगे यह बिलकुल भी साफ नहीं है लेकिन जॉनसन ने आगाह किया है कि उनका करार इस जटिल ब्रेक्जिट प्रक्रिया से बाहर निकलने का सबसे बेहतरीन तरीका है. इस पेचीदा प्रक्रिया के चलते ब्रिटेन 2016 से राजनीतिक संकट में घिरा हुआ है. कंजरर्वेटिव पार्टी के प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा, ‘‘ उनका करार आगे बढ़ने का रास्ता है और यह ब्रिटेन एवं ईयू के मित्रों के बीच नया एवं बेहतर समझौता है.’’ जॉनसन ईयू से 46 वर्ष पुराने संबंध को 31 अक्टूबर तक तोड़ने के लिए स्पष्ट मतदान चाहते हैं जिससे ईयू से अलग होने को मंजूरी मिल जाएगी या उसे खारिज कर दिया जाएगा, लेकिन सांसद करार को मंजूरी देने के लिए संशोधन प्रस्तावित कर रहे हैं जिसमें करार को लागू करने के लिए जरूरी विधेयक के पारित होने तक क्रियान्वयन को रोकने को कहा गया है.

उनको डर है कि अगर सांसद करार को मंजूरी भी दे दें तो 31 अक्टूबर तक ईयू से अलग होने के करार पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा, जिसका नतीजा आकस्मिक रूप से बिना समझौते ब्रेग्जिट हो जाएगा. अगर मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी की ओर से समर्थित संशोधन को पारित कर दिया जाता है तो इससे जॉनसन को ईयू नेताओं से ब्रेग्जिट में देरी करने के लिए कहना होगा. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट के अधिकारियों ने बताया कि अगर संशोधन पारित हो जाता है तो भी सोमवार को विधेयक पेश किया जाएगा और उम्मीद की जा रही है इस पर चर्चा होगी एवं समय पर पारित हो जाएगा. जॉनसन ने कहा, ‘‘ देरी आधारहीन, महंगी और लोगों के भरोसे को क्षीण करने वाली होगी.

(इनपुट भाषा)