पहले युद्ध रोको, फिर न्यूक्लियर डील! क्या ये प्रस्ताव मानेंगे अमेरिका और ईरान, आज की रात फैसले की घड़ी

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:April 6, 2026 2:43 PM IST

America-Iran ceasefire: अगर दोनों पक्ष राजी हुए तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है. लेकिन, इस मामले में सबसे बड़ा पेच ये है कि सभी बिंदुओं पर आज ही सहमति बननी जरूरी है.

Iran vs America War: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण संघर्ष को बड़ी तबाही में बदलने से रोकने के लिए एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है. ये प्रस्ताव पाकिस्तान की तरफ से सुझाया गया है और एक दिन पहले ही दोनों पक्षों के साथ साझा किया गया है. इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और न्यूक्लियर डील करने की बात शामिल है.

Advertising
Advertising

निर्णय लेने के लिए बेहद कम समय बचा है

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपने सूत्र के हवाले से बताया कि यह योजना सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) से लागू हो सकती है. अगर दोनों पक्ष राजी हुए तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है. लेकिन, इस मामले में सबसे बड़ा पेच ये है कि सभी बिंदुओं पर आज ही सहमति बननी जरूरी है.

रॉयटर्स के अनुसार, शुरुआती सहमति को एक 'समझौता ज्ञापन' (MOU) का रूप दिया जाएगा. इसे पाकिस्तान के जरिए अंतिम रूप दिया जाएगा. ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बैक डोर बातचीत में पाकिस्तान ही संपर्क का एकमात्र माध्यम है.

सीजफायर प्रस्ताव में क्या शामिल है?

इस योजना के तहत, सबसे पहले तत्काल युद्धविराम लागू होगा. इसके बाद एक व्यापक समझौते पर बातचीत करने के लिए 15 से 20 दिनों का समय दिया जाएगा. युद्धविराम लागू होने के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा. इस प्रस्ताव को अनौपचारिक रूप से "इस्लामाबाद समझौता" कहा जा रहा है. पाकिस्तान को उम्मीद है कि अगले दौर की बातचीत में दोनों पक्ष इस्लामाबाद में आमने सामने बैठकर बात करेंगे.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अंतिम बातचीत में ईरान को परमाणु हथियार न बनाने के लिए सहमत किया जाएगा. बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी और संपत्ति को अनफ्रीज किया जा सकता है. हालांकि ईरान ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

क्यों मुश्किल है समझौता?

ईरान किसी भी तरह के अस्थाई युद्धविराम के लिए सहमत नहीं है. ईरान एक स्थायी संघर्ष-विराम चाहता है. ईरान यह आश्वासन भी चाहता है कि अब भविष्य में अमेरिका या इजरायल की तरफ से उस पर कोई हमला नहीं किया जाएगा. ईरान ने ये संदेश पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ाए हैं.

समय है बेहद महत्वपूर्ण

पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के माध्यम से किसी भी समझौते पर पहुंचने के लिए ईरान के पास समय बहुत ही कम है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार से ईरान के ऊर्जा ठिकानों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी है. जवाब में ईरान ने कहा है कि किसी भी अमेरिकी हमले के जवाब में वह बड़ी कार्रवाई करेगा जो पूरे क्षेत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा.

Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें