लंदन: दुनिया में जारी कोरोना वायरस के कहर के बीच साइंटिस्‍टों ने इसके रूप में हुए बदलावों का पता किया है. वैज्ञानिकों ने इसकी तीन वंशावली भी खोज निकाली है. बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण से अबतक 95 हजार से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं और करीब 15 लाख से ज्‍यादा संक्रमित हैं. Also Read - क्या अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की कोरोना से हुई मौत?, सोशल मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म

वैज्ञानिकों ने वुहान से शुरू होकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद इस विषाणु की उत्पत्ति से लेकर अब तक के क्रमिक विकास का पता लगा लिया है. यह ऐसी कामयाबी है जो कोरोना वायरस की उत्पत्ति से लेकर उसके स्वरूप में हुए तमाम परिवर्तनों पर रोशनी डालेगी. Also Read - राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमितों का आंकड़ा 10128, अब तक मृतक संख्‍या 219

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक नोवल कोरोना वायरस के तीन विभिन्न रूपांतर हैं, जो करीब से संबंधित वंशों का समूह है जिन्हें उन्होंने ए, बी और सी से अंकित किया है. Also Read - अगले हफ्ते से खुलेंगे तिरुमला मंदिर और सबरीमला मंदिर के पट, शर्तों के साथ मिलेगा प्रवेश

अध्ययन में मानव मरीजों से अनुक्रमित शुरुआती 160 पूर्ण विषाणु जीनोम (जीनों का समूह) का आकलन कर सार्स-सीओवी-2 के कुछ मूल प्रसार को वंशावलियों में इसके परिवर्तित स्वरूप के जरिए मानचित्रित किया गया.

स्‍डडी के प्रमुख लेखक, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के आनुवंशिकी विज्ञानी पीटर फोर्स्टर ने कहा, ”बहुत तेजी से बहुत उत्परिवर्तन हुए हैं, जिससे कोविड-19 वंश वृक्ष को ठीक-ठीक समझना मुश्किल था. हमने विश्वसनीय लगने वाली सभी वंशावलियों की एक साथ कल्पना करने के लिए गणित के नेटवर्क अल्गोरिद्म का इस्तेमाल किया.”

फोर्स्टर ने कहा, ”इन तकनीकों को ज्यादातर डीएनए के जरिए पूर्व ऐतिहासिक मानव आबादी के विकास के मानचित्रण के लिए जाना जाता है. हमारा मानना है कि यह पहली बार है, जब उन्होंने कोविड-19 जैसे कोरोना वायरस के क्रमिक विकास का पता लगाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है.”

वैज्ञानिकों ने 24 दिसंबर 2019 से लेकर चार मार्च 2020 के बीच दुनिया भर से लिए नमूनों से विषाणु के जीनोम से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल किया है.

अध्ययन में कोविड-19 के तीन रूपांतरों और उनमें हुए उत्परिवर्तनों के बारे में विस्तार से बताया गया है. यह अध्ययन ‘पीएनएएस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.