आसमान ही नहीं, समुद्र का किंग भी बना ड्रैगन, बना रहा सबसे तेज और सबसे ज्यादा पनडुब्बियां

China Submarines: चीन पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से सबमरीन बना रहा है. क्या ये भारत के लिए चिंता का बात है?

Published date india.com Published: February 17, 2026 3:58 PM IST
आसमान ही नहीं, समुद्र का किंग भी बना ड्रैगन, बना रहा सबसे तेज और सबसे ज्यादा पनडुब्बियां
(photo credit reuters, for representation only)

China Submarines: चीन ने पिछले पांच सालों में परमाणु ऊर्जा वाला पनडुब्बियों का उत्पादन बढ़ा दिया है. बीजिंग अब वाशिंगटन से भी तेजी से सबमरीन लॉन्च कर रहा है. आइये जानते हैं कि क्यों ये अमेरिका और भारत के लिए चिंता की बात है.

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (IISS) की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन को लंबे समय से मिली समुद्री ताकत का फ़ायदा खत्म होने का खतरा है. चीन के कंस्ट्रक्शन का अंदाज़ा लगाने के लिए शिपयार्ड सैटेलाइट इमेजरी को देखा गया. बता दें कि बीजिंग फ्लीट नंबर नहीं बताता है.

चीन बैलिस्टिक-मिसाइल और अटैक सबमरीन दोनों से लैस

रिपोर्ट में कया गया है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी की न्यूक्लियर-पावर्ड सब फोर्स में बैलिस्टिक-मिसाइल और अटैक सबमरीन दोनों शामिल हैं.

रिपोर्ट की बड़ी बातें

  • 2021 से 2025 के दौरान, चीन की सबमरीन बिल्डिंग ने लॉन्च की गई सबमरीन की संख्या – 10 से 7 पांच हैं.
  • टन में इनकी क्षमता 79,000 से 55,500, के बीच है
  • क्वालिटी के मामले में चीनी डिज़ाइन लगभग निश्चित रूप से US और यूरोपियन बोट्स से पीछे हैं

  • सबसे नई चीनी सब्स US सब्स जितनी शांत नहीं हैं, जिससे US नेवी को स्टेल्थ का फायदा मिलता है

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एक दशक पहले पीछे था चीन

IISS एनालिसिस के मुताबिक, 2016 से 2020 के समय में यह एक बड़ा बदलाव है, जब चीन ने US नेवी की सात (55,500 टन) सबमरीन में सिर्फ़ तीन (23,000 टन) सबमरीन जोड़ी थीं.

आज चीन की ताकत

IISS के “मिलिट्री बैलेंस 2025” के मुताबिक, 2025 की शुरुआत तक, चीन के पास 12 एक्टिव न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन, छह बैलिस्टिक-मिसाइल बोट और छह गाइडेड-मिसाइल या अटैक बोट थीं. एक अन्य स्रोत के मुताबिक चीन के पास कुल 60 सबमरीन हैं. वहीं US के पास कुल 65 सबमरीन हैं. भारत की बात करें तो 16 से 18 पनडुब्बियां हैं. जाहिर तौर पर ये बड़ा अंतर नई दिल्ली के लिए परेशान करने वाला है.

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