चीन का दोगला चेहरा बेनकाब, भारतीय सीमा के पास चुपचाप खड़ा किया आर्मी नेटवर्क; ऐसे खुला राज

चीन ने भारत की सीमा के पास एयरफील्ड और सैन्य नेटवर्क खड़ा किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में एयरफील्ड, ड्रोन बेस और PLA मूवमेंट के बारे में भी पता चला. चलिए जानते हैं ड्रैगन की इस चाल का खुलासा हुआ.

Published date india.com Published: December 6, 2025 4:23 PM IST
चीन का दोगला चेहरा बेनकाब, भारतीय सीमा के पास चुपचाप खड़ा किया आर्मी नेटवर्क; ऐसे खुला राज
Photo by AI

पड़ोसी देश चीन ने पिछले कुछ सालों में भारतीय सीमा के पास अपना सैन्य ढांचा मजबूत किया है. तिब्बती पठार पर बड़े एयरफील्ड, रनवे, और हेलीपोर्ट बनाए जा रहे हैं, जिससे ड्रैगन सीधे हिमालय के पश्चिमी सेक्टर की ओर बढ़ रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन यहां ऐसा नेटवर्क बना रहा है जिसमें सैन्य और नागरिक दोनों तरह की सुविधाएं शामिल हैं. इसका मतलब हुआ कि अगर कभी तनाव या संघर्ष जैसी स्थिति पैदा होती है, तो चीन की सेना कुछ ही घंटों में इस कठिन इलाके में तैनात हो सकती है.

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा चीन का बढ़ता नेटवर्क

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रियल-टाइम इंटेलिजेंस कंपनी ब्लैकस्काई की 100 से ज्यादा सैटेलाइट फोटो का विश्लेषण कर यह खुलासा किया है कि ल्हुंजे, बुरंग और टिंगरी में नए डुअल-यूज एयरफील्ड तैयार किए जा रहे हैं. इन जगहों पर इतने बड़े एप्रन बनाए गए हैं कि यहां एक साथ करीब 70 से ज्यादा लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन खड़े किए जा सकते हैं.

तस्वीरों में साफ देखा गया है कि चीनी सेना अलग-अलग तरह के लड़ाकू जेट, टोही ड्रोन और अटैक हेलीकॉप्टरों की तैनाती की तैयारी कर रही है. इससे सिर्फ भारत के खिलाफ चीन की स्थिति मजबूत नहीं होती, बल्कि तिब्बत में बीजिंग की पकड़ भी और ज्यादा सख्त हो जाती है.

14,000 फीट ऊंचाई पर चल रहा है काम

भारतीय सीमा के पास ये नए एयरफील्ड 14,100 फीट की ऊंचाई पर बनाए जा रहे हैं. इतनी ऊंचाई पर निर्माण करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि यहां तापमान बहुत कम रहता है और रनवे ठंड से फट जाते हैं. इस प्रोजेक्ट पर चीन की सरकारी कंपनी चाइना एयरपोर्ट कंस्ट्रक्शन ग्रुप काम कर रही है, जो इस कठिन इलाके में आधुनिक एयरफील्ड बनाने की कोशिश कर रही है.

दूसरी तरफ, चीनी अधिकारी दावा करते हैं कि ये हवाई अड्डे स्थानीय लोगों की कनेक्टिविटी के लिए हैं. लेकिन तस्वीरों में जो मजबूत सैन्य हैंगर, शेल्टर और एयर स्ट्रिप दिखाई देती हैं. यह साफ-साफ बताती हैं कि यह निर्माण पूरी तरह सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

तनाव के बाद भी चीन नहीं रोक रहा काम

डोकलाम (2017) और गलवान घाटी (2020) के बाद चीन ने इस पूरे क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ाई हैं. लगातार ऊंचाई, ठंड और कम ऑक्सीजन के बावजूद हजारों चीनी मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मजदूरों को ऊंचाई की बीमारी, सांस की तकलीफ, सिरदर्द और नाक से खून बहने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद निर्माण जारी है.

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