बीजिंग. ‘बेल्ट एंड रोड कॉरिडोर’ परियोजना के जरिए ‘ड्रैगन’ देश यानी चीन (China) ने सबसे पहले भारत के पड़ोसी लेकिन दुश्मन देश पाकिस्तान (Pakistan) को अपने पक्ष में मिलाया. फिर इसके बाद हिन्द महासागर में स्थित दूसरे पड़ोसी श्रीलंका (Sri Lanka) में हंबनटोटा बंदरगाह के जरिए वह भारत के दूसरे छोर पर पहुंचा. चीन के बेल्ट रोड प्रोजेक्ट के ‘झांसे’ में काफी हद तक नेपाल (Nepal) भी आ ही चुका है. और अब चीन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से सटे देश म्यामार (Myanmar) तक अपनी पहुंच बना रहा है. जी हां, चीन ने भारत के पड़ोसी देश म्यामार में रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण बंदरगाह बनाने का सौदा किया है. यह बंदरगाह बंगाल की खाड़ी में स्थित होगा. Also Read - US से टकराव की तैयारी कर रहा चीन, लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा खतरा: अमेरिकी खुफिया निदेशक

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने शुक्रवार को कहा कि चीन और म्यामार ने क्याउक्प्यू शहर में गहरे जल का समूद्री बंदरगाह बनाने के करार पर हस्ताक्षर किया है. दोनों देशों ने वित्तीय एवं अन्य मुद्दों को लेकर कई सालों तक टलने के बाद बृहस्पतिवार को समझौता किया. चीन इससे पहले पाकिस्तान में अरब सागर किनारे स्थित ग्वादर में गहरे जल का समुद्री बंदरगाह बना रहा है. श्रीलंका में उसके पास हिंद महासागर में स्थित हंबनटोटा बंदरगाह है. ऐसा कहा जाता है कि चीन भारत को घेरने के लिए ‘मोतियों की माला’ रणनीति के तहत पड़ोसी देशों में रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण स्थलों पर बंदरगाह बना रहा है. हालांकि चीन ने हमेश इन आरोपों से इंकार किया है. Also Read - पाकिस्तान के पूर्व PM जफरुल्लाह खान जमाली का 76 साल की उम्र में रावलपिंडी में निधन

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि चीन की सरकारी कंपनी सिटिक ग्रुप की अगुवाई में कंपनियों के एक समूह ने म्यामार की राजधानी ने-प्सी-ताव में क्याउक्प्यू विशेष आर्थिक क्षेत्र प्रबंधन समिति के साथ करार की रूपरेखा पर हस्ताक्षर किया. करार के तहत चीन निवेश का 70 प्रतिशत देगा जबकि म्यामार शेष 30 प्रतिशत का वित्तपोषण करेगा. परियोजना के प्रारंभिक चरण में 1.3 अरब डॉलर के निवेश से बनने वाला दो गोदी शामिल है. बंदरगाह के निर्माण एवं परिचालन के लिये संयुक्त उपक्रम बनाया जाएगा. Also Read - पाकिस्तानी ऑलराउंडर ने कहा-सेलेक्टर्स ही बता सकते हैं कि मुझे टीम से बाहर क्यों किया