बीजिंगः वुहान के अस्थाई अस्पताल से अंतिम जत्थे के मरीजों को स्वस्थ होकर छुट्टी मिली. इसके साथ चीन के हुपेइ प्रांत के वुहान शहर में नोवेल कोरोना वायरस के मुकाबले के लिए स्थापित सभी 16 अस्थाई अस्पताल बंद हो गए हैं. सूत्रों के अनुसार महामारी के दौरान वुहान शहर में इस्तेमाल अस्थाई अस्पतालों ने 12 हजार से अधिक हल्के रूप से नोवेल कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज किया. अस्थाई अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों ने कि अस्थाई अस्पताल की स्थापना से न सिर्फ चीनी गति और चीनी शक्ति दिखाई गयी, बल्कि चीनी बुद्धिमता भी जाहिर हुई है. Also Read - बिना किसी दिक्कत के बाजारों तक पहुंच सके जरूरी सामान, रेलवे ने शुरू की पार्सल वैन सेवा

पूर्वी चीन के च्यांगसू प्रांत के नानचिंग शहर आये डॉक्टर योंगयोंगफंग ने बताया, “मैं नानचिंग शहर के नंबर 2 अस्पताल का उपनिदेशक हूं. मैं मुख्य तौर पर संक्रमणकारी रोग और जिगर बीमारी से जुड़े काम करता हूं. वुहान की गंभीर स्थिति को देखकर इस फरवरी के शुरू में मैंने आवेदन किया कि अगर जरूरत पड़ती है तो मैं वुहान और हुपेइ आ सकता हूं.” Also Read - कोविड-19 महामारी के कारण शुरू नहीं हो सका IPL 2020, 'इडियट बॉक्स' पर नहीं दिखे MS Dhoni

9 फरवरी को यांगयोंगफंग च्यांगसू प्रांत की हुपेइ प्रांत की सहायता के लिए पांचवीं चिकित्सक टीम के साथ वुहान पहुंचे. इस टीम में 300 से अधिक चिकित्सक हैं, जो विभिन्न क्लिनिक विभागों से आये हैं. क्योंकि इस चिकित्सक टीम में संक्रमणकारी बीमारी का इलाज करने के अनुभव वाले चिकित्सक अधिक नहीं है. वुहान पहुंचने के बाद पहले दो दिन में यांगयोंगफंग ने नोवेल कोरोना वायरस निमोनिया के बुनियादी इलाज और व्यक्तिगत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. चार दिन के बाद अस्थाई अस्पताल स्थापित हुआ और मरीजों को स्वीकार करने लगा. Also Read - देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले एक हजार से अधिक, मृतकों की संख्या 27

यांगयोंगफंग एक तरफ पहली पंक्ति में डॉक्टर थे और दूसरी तरफ वुहान विकास क्षेत्र खेल केंद्र अस्थाई अस्पताल के उपनिदेशक भी थे. उन्होंने बताया, सबसे पहले मरीजों की संख्या में तेज वृद्धि हुई. सिर्फ दो या तीन दिनों में सभी बेड्ज भर गए. एक हफ्ते से अधिक समय के बाद यांगयोंगफंग और उनके सहयोगियों ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पहले जत्थे के मरीजों को विदाई दी. इसके बाद हर दिन अस्पताल में छुट्टी पाने वाले मरीजों की संख्या अस्पताल में भर्ती कराये गये मरीजों की संख्या से अधिक हो गयी और कुछ समय के बाद अस्पताल में आने वाले मरीज बहुत कम हो गये हैं.

डॉ. यांगयोंगफंग ने कहा कि शुरू में कुछ मरीजों को अस्थायी अस्पताल के स्तर पर संदेह था. लेकिन तथ्यों से साबित है कि यह बड़ी महामारी की रोकथाम में एक कारगर और प्रभावी कदम है. अवश्य एक स्टेडियम को अस्पताल के रूप में बदलना उनके कैरियर में एक नया अनुभव है.