China Mapping Sea Routes Leading To Strait Of Malacca Around India For Future War Know Details
कहीं भारत मलक्का को 'होर्मुज' न बना दे! बड़ी तैयारी में जुटा चीन, हिंद महासागर में कौन सी रिसर्च करा रहे हैं शी जिनपिंग?
चीन ऐसा डेटा इकट्ठा कर रहा है जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ उसकी पनडुब्बी युद्ध क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ा सकता है. साथ ही चीन हिंद महासागर में भारत के दबदबे की काट भी खोज रहा है.
China mapping Indian ocean: अमेरिका के साथ युद्ध में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है. ईरानी नौसेना ने होर्मुज को ब्लॉक कर के पूरी दुनिया को झटका दिया है. युद्ध पर बारीकी से नजर रख रहे चीन ने इस घटना से कई सबक सीखे हैं. अब चीन प्रशांत, हिंद और आर्कटिक महासागरों में समुद्र की मैपिंग और निगरानी का एक बड़ा कार्यक्रम चला रहा है. इसके तहत चीन कुछ खास डेटा इकट्ठा कर रहा है.
महासागरों की मैपिंग क्यों कर रहा है चीन?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन दर्जनों रिसर्च जहाजों के साथ प्रशांत, हिंद और आर्कटिक महासागर में मैपिंग का काम कर रहा है. इस काम में पानी के नीचे सैकड़ों सेंसर लगाए गए हैं. चीन ऐसा डेटा इकट्ठा कर रहा है जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ उसकी पनडुब्बी युद्ध क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ा सकता है. साथ ही चीन हिंद महासागर में भारत के दबदबे की काटभी खोज रहा है.
दोहरी चाल चल रहा है चीन
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन की गतिविधि का पैमाना और तरीका एक दोहरे इस्तेमाल वाली रणनीति की ओर इशारा करता है. ऊपरी तौर पर यह नागरिक काम लगता है लेकिन, इसके नीचे स्पष्ट रूप से सैन्य इस्तेमाल छिपे हैं. चीन लंबे समय से मलक्का जलडमरूमध्य को लेकर चिंतित रहा है. भारत या अमेरिका के साथ किसी संघर्ष की स्थिति में ये समुद्री रास्ता उसकी कमजोर कड़ी साबित हो सकता है. इस रास्ते को ब्लॉक किया गया तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी और व्यापार बर्बाद हो सकता है.
क्या भारत से डर रहा है चीन?
हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना काफी मजबूत है. मलक्का के महत्वपूर्ण मार्ग (चोकपॉइंट) के करीब होने के कारण भारत को चीन ऐसे देश के रूप में देखता है जो संघर्ष की स्थिति में इसकी तेल और गैस सप्लाई को रोक सकता है. चीन में इसे “मलक्का दुविधा” के रूप में जाना जाता है. यही कारण है कि चीन भारत और श्रीलंका के आसपास के जलक्षेत्र की भी मैपिंग कर रहा है. माना जा रहा है कि चीन किसी भी संभावित नाकेबंदी का मुकाबला करने के लिए ऐसा कर रहा है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 5 सालों में कम से कम 42 चीनी रिसर्च शिप प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सर्वेक्षण कर रहे हैं. ओशन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना द्वारा संचालित ‘डोंग फांग होंग 3’ नाम का जहाज 2024 और 2025 के बीच ताइवान, गुआम और हिंद महासागर के रणनीतिक हिस्सों के पास कई मिशन चला चुका है. ऐसे जहाजों ने श्रीलंका तथा इंडोनेशिया के बीच के जलक्षेत्र में भी कई बार चक्कर लगाए है जिसमें मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचने वाले रास्ते भी शामिल थे.
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