वॉशिंगटन: यूएस ने कहा है कि चीन अपने यहां मुसलमानों के खिलाफ दमन बंद करना चाहिए. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि चीन अपने यहां मुसलमानों के साथ किए जाने वाले बर्ताव को लेकर शर्मनाक पाखंड करता है. साथ ही, इस्लामी आतंकवादी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है. पोम्पियो का इशारा चीन के उस कदम की ओर था, जब उसने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को “वैश्विक आतंकवादी” घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में अड़ंगा लगा दिया था. Also Read - लगातार दूसरा शतक जड़ने वाले स्मिथ ने किया खुलासा- दूसरे वनडे में खेलने पर संशय था

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पोम्पिओ ने बुधवार को मसूद अजहर का नाम लिये बगैर ट्वीट किया, “दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती. एक ओर चीन अपने यहां लाखों मुसलमानों पर अत्याचार करता है, वहीं दूसरी ओर वह इस्लामी आतंकवादी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है. Also Read - भारत की मेजबानी में 30 नवंबर को एससीओ नेताओं की बैठक में भाग लेंगे चीन के प्रधानमंत्री

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया था, जिसमें चीन ने अड़ंगा डाल दिया था.

चीन ने दलील दी थी कि उसे इस विषय पर विचार करने के लिए और समय चाहिए. चीन को छोड़ कर संरा सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों ने प्रस्ताव को स्वीकार किया था.

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पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि चीन अप्रैल 2017 से शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से ज्यादा उइगरों, कजाखों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को हिरासत में ले चुका है. उन्होंने कहा, “अमेरिका इन लोगों और उनके परिवारों के साथ खड़ा है. चीन को हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करना चाहिए और उनके दमन को रोकना चाहिए.

पोम्पिओ ने शिनजियांग में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ चीन के “दमन और हिरासत अभियान” में बचे लोगों और उनके परिवार के सदस्यों से बुधवार को मुलाकात की. उन्होंने कहा, “मैं चीन से इन नीतियों को समाप्त करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने की अपील करता हूं.”