वॉशिंगटन: यूएस ने कहा है कि चीन अपने यहां मुसलमानों के खिलाफ दमन बंद करना चाहिए. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि चीन अपने यहां मुसलमानों के साथ किए जाने वाले बर्ताव को लेकर शर्मनाक पाखंड करता है. साथ ही, इस्लामी आतंकवादी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है. पोम्पियो का इशारा चीन के उस कदम की ओर था, जब उसने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को “वैश्विक आतंकवादी” घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में अड़ंगा लगा दिया था.Also Read - Cryptocurrency: सिंगापुर ने भी क्रिप्टो प्लेयर्स को विज्ञापनों के माध्यम से जनता को नहीं लुभाने की दी चेतावनी

अमेरिका ने मसूद अजहर को ब्‍लैक लिस्‍ट में डालने के लिए यूएन में मसौदा प्रस्ताव पेश किया Also Read - भारत के खिलाफ वनडे सीरीज जीत से हमें काफी आत्मविश्वास मिलेगा: टेम्बा बावुमा

पोम्पिओ ने बुधवार को मसूद अजहर का नाम लिये बगैर ट्वीट किया, “दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती. एक ओर चीन अपने यहां लाखों मुसलमानों पर अत्याचार करता है, वहीं दूसरी ओर वह इस्लामी आतंकवादी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है. Also Read - ICC Test Championship Points Table (2021-23): शर्मनाक स्थिति में 'क्रिकेट का जनक' इंग्लैंड, एशेज सीरीज जीतकर जानिए किस स्थान पर ऑस्ट्रेलिया?

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया था, जिसमें चीन ने अड़ंगा डाल दिया था.

चीन ने दलील दी थी कि उसे इस विषय पर विचार करने के लिए और समय चाहिए. चीन को छोड़ कर संरा सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों ने प्रस्ताव को स्वीकार किया था.

भारत की ताकत देख चीन का शांतिपाठ, कहा- आशा है कि सभी देश अंतरिक्ष में शांति कायम रखने के लिए कार्य करेंगे

पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि चीन अप्रैल 2017 से शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से ज्यादा उइगरों, कजाखों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को हिरासत में ले चुका है. उन्होंने कहा, “अमेरिका इन लोगों और उनके परिवारों के साथ खड़ा है. चीन को हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करना चाहिए और उनके दमन को रोकना चाहिए.

पोम्पिओ ने शिनजियांग में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ चीन के “दमन और हिरासत अभियान” में बचे लोगों और उनके परिवार के सदस्यों से बुधवार को मुलाकात की. उन्होंने कहा, “मैं चीन से इन नीतियों को समाप्त करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने की अपील करता हूं.”