नई दिल्लीः दूसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने कड़े तेवर दिखाए हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि चीन अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देगा और देश अपने दुश्मनों के साथ खूनी संघर्ष के लिए तैयार है. शी ने चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के वार्षिक सत्र में कहा कि हम हमारी जमीन का एक इंच टुकड़ा भी किसी को नहीं देंगे और इसे चीन से कोई ले भी नहीं सकता. शी ने ग्रेट हॉल में कहा कि हम अपने दुश्मनों के खिलाफ खूनी लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.Also Read - नोएडा की कंपनी ने बनाए चीनी सैनिकों के दांत खट्टे करने वाले औजार, देखकर आप भी दंग रह जाएंगे

चीन को ताइवान और हांगकांग के देश से पृथक हो जाने का डर है. ताइवान स्वशासित द्वीप है, जिस पर बीजिंग अपना दावा करता है और भविष्य में इसके चीन के साथ मिलने की आशा करता है. पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी और अब चीन के एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग में लोग बीजिंग के बढ़ते हस्तक्षेप से खफा हैं. प्रधानमंत्री ली केकियांग ने भी शी के विचार को दोहराया. Also Read - आर्मी ने चीन की हरकत पर नजर रखने LAC पर इजराइली ड्रोन Heron Mark-I UAV से बढ़ाई निगरानी

ली ने एनपीसी सत्र के अंतिम दिन एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए ढृढ़ है और अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेगा. देश न ही किसी अन्य देश का इंच टुकड़ा लेगा और न ही किसी को देगा. Also Read - सेला सुरंग: आखिरी चरण आज से होगा शुरू, तवांग से चीन सीमा तक 10 किमी घटेगी दूरी

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को फिर से राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के लिए बधाई दी और साथ ही कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं.

इससे पहले रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वह नहीं मानती हैं कि चीन के साथ डोकलाम के मुद्दे पर हुआ गतिरोध दोबारा कायम होगा. सीतारमण ने कहा कि भारत ने विभिन्न स्तरों पर चीन से संवाद की प्रक्रिया स्थापित की है. उन्होंने कहा था कि मैं निश्चित तौर पर कहती हूं कि मैं डोकलाम-2 के बारे में नहीं सोच रही. लेकिन विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है.

गौरतलब है कि पिछले साल डोकलाम में भारत और चीन की थलसेना के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बना रहा था. दोनों देशों के बीच जटिल वार्ता प्रक्रिया के बाद अगस्त में गतिरोध खत्म हुआ था. रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि विभिन्न स्तरों पर संवाद के बावजूद थलसेना को हर पल चौकस रहने की जरूरत है.