बीजिंग: एलएसी पर विवाद के बीच एक बार फिर चीन ने विवादित बयान दिया है.चीन ने मंगलवार को कहा कि वह लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य उद्देश्यों के लिए भारत द्वारा बुनियादी ढांचे के निर्माण का विरोध करता है. पड़ोसी देश ने कहा कि दोनों देशों को उन गतिविधियों से बचना चाहिए, जिससे स्थिति सुलझने के बजाय और अधिक जटिल हो जाए. जबकि भारत चीन के एलएसी पर 1959 के एकतरफा रुख पर आज आपत्ति जताई है.Also Read - फिलीपीन ने भारत एवं नौ अन्य देशों पर यात्रा पाबंदियां 15 अगस्त तक के लिए बढ़ायीं

भारत ने मंगलवार को चीन के इस दृष्टिकोण को खारिज किया कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की अवधारणा पर 1959 के अपने रुख को मानता है. भारत ने साथ ही कहा कि पड़ोसी देश तथाकथित सीमा की ”अपुष्ट एकतरफा” व्याख्या करने से बचे. Also Read - भारत ने 31 अगस्‍त तक इंटरनेशनल यात्री उड़ानों पर प्रतिबंध बढ़ाया, पढ़ें ये गाइडलाइंस

पश्चिमी मीडिया के एक पत्रकार के सवाल के जवाब में यहां चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, ”चीन ने भारत की ओर से अवैध तरीके से बनाए गए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को मान्यता नहीं दिया है.” पत्रकार ने उनसे भारत के लद्दाख क्षेत्र में चीन से लगी सीमा पर में अधिक ऊंचाई वाले सड़क नेटवर्क के निर्माण को प्राथमिकता देने के संबंध में एक सवाल पूछा था. Also Read - तीन साल में देश की 49 और नदियां हो गई प्रदूषित, लोकसभा में सरकार ने दी जानकारी

बता दें कि पांच अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभक्त किए जाने के एक दिन बाद चीन ने लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम का विरोध किया था, तो विदेश मंत्रालय के तत्कालीन प्रवक्ता ने कहा था कि भारत अन्य देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है और इसी तरह अन्य देशों से भी इसी तरह की अपेक्षा करता है.

वांग ने कहा, ” हम लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य उद्देश्यों के लिए भारत द्वारा बुनियादी ढांचे के निर्माण का विरोध करते हैं. दोनों देशों को सीमा क्षेत्रों में ऐसी किसी भी गतिविधि में संलिप्त नहीं होना चाहिए, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो जाए.”

चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास करने से संबंधित खबरों पर पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में वांग ने कहा कि कुछ संस्थानों द्वारा जारी की गई वैसी खबरें पूरी तरह से गलत हैं, जिनमें कहा गया है कि चीन ने अपनी तरफ नए सैन्य अड्डे बनाए हैं.

वांग ने ने कहा, ”चीन भारत के साथ हस्ताक्षरित समझौतों का पूरी तरह से पालन करता है. हम भारत के साथ सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल कायम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और वहीं दूसरी ओर हम अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की दृढ़ता से रक्षा करते हैं.” वहीं, जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष पूरी ईमानदारी और विश्वासपूर्वक सभी समझौतों और समझ का पालन करेगा और एलएसी की एकतरफा व्याख्या को आगे बढ़ाने से बचना चाहिए.

वांग ने कहा कि लंबे समय से चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट अपनी तरफ गतिविधियों का संचालन कर रहा है और उसने हमेशा प्रासंगिक समझौतों का पालन किया है. उन्होंने कहा, ”हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष भी उसी लक्ष्य के लिए काम करेगा और चीन के साथ मिलकर स्थिति को शांत करने और दोनों पक्षों द्वारा स्थिति को सामान्य बनाने के लिए किए जा रहे ठोस प्रयासों में जटिल कारकों को जोड़ने से बचेगा.”

पूर्वी लद्दाख में लगभग पांच महीने से चले आ रहे गतिरोध के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग एलएसी की अवधारणा के बारे में 1959 के अपने रुख को मानता है.  इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, हमने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की स्थिति पर एक चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के हवाले से रिपोर्ट देखी है. भारत ने तथाकथित एकतरफा परिभाषित 1959 की LAC को कभी स्वीकार नहीं किया है. चीन के बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा, ”भारत ने कभी भी 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार नहीं किया है. यह स्थिति बरकरार रही है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता श्रीवास्तव ने कहा, दोनों पक्ष 2003 तक LAC को स्पष्ट करने और पुष्टि करने की कवायद में लगे थे, लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि चीनी ने इच्छा नहीं दिखाई. इसलिए, अब चीनी आग्रह है कि केवल एक LAC उनके द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के विपरीत है.