बीजिंग: चीन ने पहली बार एक साथ हाइपरसोनिक विमान के तीन तरह के मॉडलों का सफल परीक्षण किया है. आयुध ढोने में सक्षम किसी भी हथियार को रोकने के लिए इसकी गति आवश्यकता अनुसार घटाई बढ़ाई जा सकेगी. पहली बार स्टारी स्काय-दो नामक हाइपरसोनिक ग्लाइडर के परीक्षण में इसे रॉकेट के जरिए छोड़ा गया और फिर यह अपने शॉक वेभ मैक6 (ध्वनि की रफ्तार से 6 गुना, या 7,344 किलोमीटर प्रति घंटे) पर चलता है.Also Read - भारत, चीन पूर्वी लद्दाख में लंबित मुद्दों को तेजी से हल करने को सहमत: संयुक्त बयान

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सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम चीन में जीउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र में 21 सितंबर को विमानों के तीन मॉडलों का परीक्षण किया गया. फुटेज से पता चलता है कि तीनों मॉडल की अलग-अलग डिजाइन है. तीनों को डी 18-1एस, डी18-2एस और डी-18 3 एस कोड नाम दिया गया है. इसे गुब्बारे के सहारे छोड़ा गया.

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मीडिया की एक अन्य खबर के मुताबिक, हाइपरसोनिक विमान की रफ्तार को भी आवश्यकता अनुसार घटाई -बढ़ाई जा सकती है. हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के मुताबिक इस तरह के हाइपरसोनिक विमानों का चीन ने पहली बार परीक्षण किया है. यह परमाणु हथियार ढोने में संपन्न विमानों पर सटीकता से हमला कर सकेगा.

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पिछले महीने चीनी वैज्ञानिकों ने पहली बार स्टारी स्काय-दो नामक हाइपरसोनिक ग्लाइडर का परीक्षण किया था. इसे रॉकेट के जरिए छोड़ा गया और फिर यह अपने शॉक वेभ मैक छह (ध्वनि की रफ्तार से छह गुणा, या 7,344 किलोमीटर प्रति घंटे) पर चलता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह विकसित होने के बाद इसकी रफ्तार इतनी होगी कि यह मौजूदा पीढ़ी की मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणालियों में प्रवेश कर सकता है.