नई दिल्ली: चीन ने हांगकांग को मकाऊ और झुहेई शहर से जोड़ने वाले, समुद्र पर बने दुनिया के सबसे लंबे पुल को मंगलवार को आधिकारिक रूप से खोल दिया. समुद्र पर बना यह पुल 55 किलोमीटर लंबा है. राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन के दक्षिणी ग्वांगदोंग प्रांत में झुहेई में आयोजित एक विशेष समारोह में 20 अरब डॉलर की लागत से बने पुल का उद्घाटन किया. इस कार्यक्रम में हांगकांग और मकाऊ के नेताओं समेत करीब 700 मेहमान शामिल हुए. Also Read - चीन में फिर खुला जानवरों का बाजार, बिकने लगे चमगादड़ और पैंगोलिन, एक्ट्रेस बोलीं- अब खुद को खा जाओ

sea-crossing bridge Also Read - कोविड-19 महामारी के केंद्र रहे चीन को एशियाई युवा खेल 2021 की मिली मेजबानी

हांगकांग स्थित साऊथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, शी ने एक वाक्य बोलकर इस पुल का उद्घाटन किया.चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि पर्ल नदी के मुहाने पर लिंगदिंगयांग जल क्षेत्र में बना यह पुल समुद्र पर बना दुनिया का सबसे लंबा पुल है. Also Read - Covid-19: UN ने कहा- विश्व अर्थव्यवस्था मंदी में चली जाएगी, भारत, चीन हो सकते हैं अपवाद

पुल को सामान्य यातायात के लिए बुधवार से खोला जाएगा. इस पुल के निर्माण से हांगकांग और झुहेई के बीच यात्रा करने में लगने वाला तीन घंटे का समय घटकर 30 मिनट रह जाएगा. चीन के उप प्रधानमंत्री हान झेंग ने कहा कि यह पुल हांगकांग तथा चीन के मुख्य भूभाग को आर्थिक तथा व्यापार गतिविधियों के लिहाज से और करीब लाएगा. इस पुल से हांगकांग और मकाऊ को चीन के मुख्य भूभाग से जोड़ने में मदद मिलेगी.

समुद्र के ऊपर बने इस पुल में सड़क के अलावा 7 किलोमीटर की सुरंग भी है, जो पानी के भीतर के सफर का मजा देगी. इस पुल को बनाने में जितने स्टील का इस्तेमाल हुआ है उससे 60 एफिल टावर बनाए जा सकते हैं. यह पुल दक्षिणी चीन के शहर जुहाई से हांगकांग और मकाऊ को जोड़ेगा. हालांकि इस पुल को 2017 में ही पूरा होना था, लेकिन निर्माण संबंधी दिक्कतों और कुछ विवादों की वजह से यह पुल इस साल शुरू होगा.

समुद्र के ऊपर 55 किलोमीटर पुल बनाने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी के विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण की दृष्टि से यह पुल कम से कम 120 साल तक कार्यरत रहेगा. साथ ही अभी इस रास्ते से होने वाले व्यापार में लगने वाले समय को 60 प्रतिशत तक कम कर देगा. पुल के शुरू हो जाने के बाद 3 घंटे की दूरी मात्र 30 मिनटों में पूरी की जा सकेगी. पुल के निर्माण में 4 लाख 20 हजार टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है, जिससे 60 एफिल टावर और खड़े किए जा सकते हैं.