नई दिल्ली: चीन को कठोर संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि ‘‘विस्तारवाद’’ का युग समाप्त हो चुका है तथा पूरे विश्व ने इसके खिलाफ मन बना लिया है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूरे भाषण में चीन का कहीं नाम भी नहीं लिया लिया लेकिन फिर भी चीन को समझ आ गया कि पीएम का इशारा किसकी तरफ था. चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेह में दिए गए संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा नई दिल्ली स्थित चीन के दूतावास ने कहा है कि हमें विस्तारवादी कहना आधारहीन है. हमने 14 में से 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाया है. Also Read - दिग्विजय ने राम मंदिर शिलान्यास की तिथि को बताया अशुभ मुहुर्त, PM मोदी से किया टालने का अनुरोध

बता दें कि भारत चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे तनाव के बीच प्रधानमंत्री ने आज यहां अचानक दौरा किया और सैनिकों को संबोधित भी किया. प्रधानमंत्री के साथ प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल विपिन रावत और थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे भी थे. Also Read - Ram Mandir Bhoomi Poojan: राम मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी उमा भारती, कहा- पीएम मोदी के स्वास्थ्य की है चिंता

प्रधानमंत्री ने वहां भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और बाद में थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें संबोधित किया. उन्होंने कहा, ‘‘विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है. यह युग विकासवाद का है.’’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत में चीन के राजदूत जी रॉन्ग ने कहा है कि वह विस्तारवादी नहीं है. रॉन्ग ने ट्वीट किया, ‘चीन ने अपने 14 में से 12 पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण समझौतों से सीमांकन किया है और जमीन पर सीमा को दोस्ताना सहयोग में बदला है. ऐसा कहना कि चीन विस्तारवादी है, पड़ोसियों के साथ मनगढ़ंत तरीके से विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना आधारहीन है.’ Also Read - भारत को धर्मनिरपेक्षता जैसी 'पश्चिमी' अवधारणाओं की जरूरत नहीं: केएन गोविंदाचार्य

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीती शताब्दियों में विस्तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया और मानवता के विनाश का प्रयास किया. उन्होंने कहा, ‘‘विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है. और यह न भूलें इतिहास गवाह है. ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने को मजबूर हो गई है.’’ मोदी ने कहा, ‘‘विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है.’’